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मत्ती रचित सुसमाचार 25

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31 "जब मनअपनमहिें आएगऔर सब 25:31 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "पवित्र" लिखा है। वरगदउसकोंे, तब वह अपनमहिमय िंसन पर ा; 32 और सब िाँ उसकमनइकटी, और चरवों बकरिों अलग करतै, वह उनें एक सरअलग करा। 33 वह ों अपनिओर, और बकरिों अपनओर खड़करा। 34 तब अपनिओर ों कहा, िधनो, आओ! जगत उतपति ििगयै, उसकउततरिबनो; 35 ोंि ैं और मनिा, ैं और मनिा, ैं परदऔर मनघर ें ा, 36 ैं िवस्‍और मनवस्‍पहन, ैं और मनि ी, ैं ें और झसिलनआए 37 तब धरउससकहेंे, रभु, हमनकब और िा, और िा, 38 और कब परदऔर घर ें ा, िवस्‍और वस्‍पहन, 39 और कब हमनें और झसिलनआए? 40 तब उनें उततर ा, ैं मससच कहतूँ, मनइन इयों ें िएक िा, वह िा।’

41 "तब वह ओर ों कहा, िो, मनउस अनआग ें चलऔर उसकों िगई ै; 42 ोंि ैं और मननहीं िा, ैं और मननहीं िा, 43 ैं परदऔर मनघर ें नहीं ा, ैं िवस्‍और मनवस्‍नहीं पहन, ैं और ें और मनि नहीं ी।’ 44 तब यह कहेंे, रभु, हमनकब परदिवस्‍ें ा, और नहीं ी?’ 45 तब वह उनें उततर ा, ैं मससच कहतूँ, मनइन ों ें िएक नहीं िा, वह नहीं िा।’ 46 अनेंे, परधरअनवन ें रवकरेंे।"

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