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मत्ती रचित सुसमाचार 6

िंमत कर

25 "इसलिैं मसकहतूँ, अपनििंमत करि े, और अपनिि पहनेंे; जन और वस्‍बढ़कर नहीं? 26 आकपकिों ो, ैं और टतैं और खतों ें इकटकरतैं, िवरििउनें िै; उनसबढ़कर नहीं? 27 ममें िंकरकअपनआयें एक घड़6:27 अक्षरशः एक क्यूबिटबढ़सकतै? 28 िवस्‍िषय ें ों िंकरतो? गलसन ों पर ि बढ़तैं; परिरम करतैं और ततैं; 29 परैं मसकहतूँ ि अपनभव ें उनमें िसमवस्‍पहननहीं ा। 30 यदि परम्‍वर ो, आज और कल भटें ोंएगी, ऐसवस्‍पहनै, अलपवि्‍िो, वह ें इससबढ़कर नहीं पहनएगा? 31 इसलियह कहकर िंकरो, हम े?’ े?’ िपहनेंे?’ 32 ोंि रयहइन सब वसें रहतैं, परवरििनति ें इन सब आवशयकतै। 33 इसलिपहलपरम्‍वर और उसकिकतकरो, और सब वसें िी। 34 अतकल िंकरो, ोंि कल अपनिंआप करा; आज िआज ुःबहै।

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