31 इसलिए यह कहकर चिंता न करो, ‘हम क्या खाएँगे?’ या ‘क्या पीएँगे?’ या फिर ‘क्या पहनेंगे?’ 32 क्योंकि गैरयहूदी इन सब वस्तुओं की खोज में रहते हैं, परंतु तुम्हारा स्वर्गिक पिता जानता है कि तुम्हें इन सब की आवश्यकता है।
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31 इसलिए यह कहकर चिंता न करो, ‘हम क्या खाएँगे?’ या ‘क्या पीएँगे?’ या फिर ‘क्या पहनेंगे?’ 32 क्योंकि गैरयहूदी इन सब वस्तुओं की खोज में रहते हैं, परंतु तुम्हारा स्वर्गिक पिता जानता है कि तुम्हें इन सब की आवश्यकता है।