3 तू क्यों अपने भाई की आँख के तिनके को देखता है, परंतु अपनी आँख के लट्ठे पर ध्यान नहीं देता? 4 या तू अपने भाई से कैसे कह सकता है, ‘आ, मैं तेरी आँख से तिनका निकाल दूँ’, जबकि देख, तेरी आँख में तो लट्ठा है? 5 अरे पाखंडी, पहले अपनी आँख में से लट्ठा निकाल, तब तू अपने भाई की आँख से तिनका निकालने के लिए स्पष्ट देख पाएगा।
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