5 क्या तू अपनी दृष्टि ऐसी वस्तु पर लगाएगा जो लुप्त हो जाती है?
क्योंकि धन तो निश्चय ही पंख लगाकर उकाब के समान आकाश में उड़ जाता है।
5 क्या तू अपनी दृष्टि ऐसी वस्तु पर लगाएगा जो लुप्त हो जाती है?
क्योंकि धन तो निश्चय ही पंख लगाकर उकाब के समान आकाश में उड़ जाता है।
5 जैसे ही तुम्हारी दृष्टि इस पर जा ठहरती है, यह अदृश्य हो जाती है,
मानो इसके पंख निकल आए हों,
और यह गरुड़ के समान आकाश में उड़ जाता है.
5 जब तू अपनी दृष्टि धन पर लगाएगा,
वह चला जाएगा,
वह उकाब पक्षी के समान पंख लगाकर, निःसन्देह आकाश की ओर उड़ जाएगा।
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