23 सब से अधिक अपने मन की चौकसी कर,
क्योंकि जीवन का सोता उसी में है।
24 अपने मुँह से कुटिल बात न बोल,
और अपने होठों से छल की बातों को दूर रख।
25 तेरी आँखें सामने की ओर लगी रहें,
और तेरी दृष्टि आगे की ओर गड़ी रहे।
26 अपने पैर रखने के लिए राह को समतल बना,
तब तेरे सब मार्ग दृढ़ रहेंगे।
27 तू न दाहिने मुड़,
और न बाएँ;
अपने पैर को बुराई से दूर रख।