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Proverbs 4:23-27

HSB Hindi Standard Bible

23 सब से अधिक अपने मन की चौकसी कर,

क्योंकि जीवन का सोता उसी में है।

24 अपने मुँह से कुटिल बात न बोल,

और अपने होठों से छल की बातों को दूर रख।

25 तेरी आँखें सामने की ओर लगी रहें,

और तेरी दृष्‍टि आगे की ओर गड़ी रहे।

26 अपने पैर रखने के लिए राह को समतल बना,

तब तेरे सब मार्ग दृढ़ रहेंगे।

27 तू न दाहिने मुड़,

और न बाएँ;

अपने पैर को बुराई से दूर रख।

Em outras traduções

  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    23 सबसे अधिक अपने हृदय की रक्षा करते रहना,

    क्योंकि जीवन के प्रवाह इसी से निकलते हैं.

    24 कुटिल बातों से दूर रहना;

    वैसे ही छल-प्रपंच के वार्तालाप में न बैठना.

    25 तुम्हारी आंखें सीधे लक्ष्य को ही देखती रहें;

    तुम्हारी दृष्टि स्थिर रहे.

    26 इस पर विचार करो कि तुम्हारे पांव कहां पड़ रहे हैं

    तब तुम्हारे समस्त लेनदेन निरापद बने रहेंगे.

    27 सन्मार्ग से न तो दायें मुड़ना न बाएं;

    बुराई के मार्ग पर पांव न रखना.

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    23 सबसे अधिक अपने मन की रक्षा कर;

    क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है।

    24 टेढ़ी बात अपने मुँह से मत बोल,

    और चालबाजी की बातें कहना तुझ से दूर रहे।

    25 तेरी आँखें सामने ही की ओर लगी रहें,

    और तेरी पलकें आगे की ओर खुली रहें।

    26 अपने पाँव रखने के लिये मार्ग को समतल कर,

    तब तेरे सब मार्ग ठीक रहेंगे। (इब्रा. 12:13)

    27 न तो दाहिनी ओर मुड़ना, और न बाईं ओर;

    अपने पाँव को बुराई के मार्ग पर चलने से हटा ले।

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