12 चाहे यहूदी हो या यूनानी, उनमें कोई अंतर नहीं, क्योंकि सब का एक ही प्रभु है, और वह अपने सब पुकारनेवालों के लिए उदार है; 13 क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा।10:13 योएल 2:32
इस्राएल द्वारा संदेश का इनकार
14 परंतु जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया उसे वे कैसे पुकारें? और जिसके विषय में उन्होंने सुना नहीं उस पर वे कैसे विश्वास करें? और बिना प्रचार करनेवाले के वे कैसे सुनें? 15 और यदि उन्हें भेजा न जाए तो वे कैसे प्रचार करें? जैसा लिखा है : उनके पैर कितने सुहावने हैं जो10:15 कुछ हस्तलेखों में यहाँ "शांति का शुभ-संदेश और" लिखा है। भली बातों का सुसमाचार सुनाते हैं।10:15 यशायाह 52:7
16 परंतु सब ने सुसमाचार को नहीं माना। यशायाह कहता है : हे प्रभु, किसने हमारे संदेश पर विश्वास किया?10:16 यशायाह 53:1 17 अतः विश्वास सुनने से, और सुनना मसीह10:17 कुछ हस्तलेखों में "मसीह" के स्थान पर "परमेश्वर" लिखा है। के वचन के द्वारा होता है।