2 वृद्ध पुरुष संयमी, सम्माननीय, और समझदार हों, तथा वे विश्वास, प्रेम और धैर्य में अटल हों। 5 समझदार, पवित्र आचरण रखनेवाली, कुशल गृहणी, भली और अपने-अपने पति के अधीन रहनेवाली हों, जिससे परमेश्वर के वचन की निंदा न हो।
6 इसी प्रकार जवान पुरुषों को भी संयमी होने के लिए प्रोत्साहित कर।
12 और हमें सिखाता है कि हम अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं का इनकार करके इस युग में संयम, धार्मिकता और भक्ति का जीवन बिताएँ,