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तीतुस 2:2,5,6,12

IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

2 अर्थात् वृद्ध पुरुष सचेत और गम्भीर और संयमी हों, और उनका विश्वास और प्रेम और धीरज पक्का हो। 5 और संयमी, पतिव्रता, घर का कारबार करनेवाली, भली और अपने-अपने पति के अधीन रहनेवाली हों, ताकि परमेश्वर के वचन की निन्दा न होने पाए। 6 ऐसे ही जवान पुरुषों को भी समझाया कर, कि संयमी हों।

12 और हमें चिताता है, कि हम अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेरकर2:12 अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेरकर: इस जीवन की अनुचित इच्छा, धन, भोग-विलास, सम्मान की चाह को दर्शाता है। इस युग में संयम और धार्मिकता से और भक्ति से जीवन बिताएँ;

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  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    2 बुज़ुर्ग पुरुष संयमी, सम्मानीय, विवेकशील तथा विश्वास, प्रेम व धीरज में अटल हों.

    5 और वे विवेकशील, पवित्र, सुघड़ गृहणी व सुशील हों और अपने-अपने पति के अधीन रहें, जिससे परमेश्वर के वचन की निंदा न हो.

    6 युवकों को विवेकशील होने के लिए प्रोत्साहित करो.

    12 जिसकी हमारे लिए शिक्षा है कि हम "गलत" कामों और सांसारिक अभिलाषाओं का त्याग कर इस युग में संयम, धार्मिकता और परमेश्वर भक्ति का जीवन जिए,

  2. HLT Hindi Literal Text

    2 वृद्ध पुरुष सचेत, गम्भीर और विवेकपूर्ण हों, और उनका विश्वास, प्रेम और धीरज दृढ़ हो।

    5 और विवेकपूर्ण, शुद्ध, अच्छी ग्रहिणीयाँ, और अपने-अपने पति के अधीन रहनेवाली हों, ताकि परमेश्वर के वचन की निन्दा न होने पाए।

    6 ऐसे ही, जवान पुरुषों को भी समझाया कर, कि विवेकपूर्ण हों।

    12 हमें चिताता है, कि हम अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेरकर इस वर्तमान युग में विवेकपूर्ण और धार्मिकता से और भक्ति से जीवन बिताएँ;

  3. HSB Hindi Standard Bible

    2 वृद्ध पुरुष संयमी, सम्माननीय, और समझदार हों, तथा वे विश्‍वास, प्रेम और धैर्य में अटल हों। 5 समझदार, पवित्र आचरण रखनेवाली, कुशल गृहणी, भली और अपने-अपने पति के अधीन रहनेवाली हों, जिससे परमेश्‍वर के वचन की निंदा न हो।

    6 इसी प्रकार जवान पुरुषों को भी संयमी होने के लिए प्रोत्साहित कर।

    12 और हमें सिखाता है कि हम अभक्‍ति और सांसारिक अभिलाषाओं का इनकार करके इस युग में संयम, धार्मिकता और भक्‍ति का जीवन बिताएँ,

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