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1 कुरिन्थियों 10

इस्राएल के इतिहास से चेतावनी

1 हे भाइयों, मैं नहीं चाहता, कि तुम इस बात से अज्ञात रहो, कि हमारे सब पूर्वज बादल के नीचे थे, और सब के सब समुद्र के बीच से पार हो गए। (निर्ग. 14:29) 2 और सब ने बादल में, और समुद्र में, मूसा का बपतिस्मा लिया। 3 और सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया। (निर्ग. 16:35, व्यव. 8:3) 4 और सब ने एक ही आत्मिक जल पीया, क्योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे, जो उनके साथ-साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था। (निर्ग. 17:6, गिन. 20:11) 5 परन्तु परमेश्वर उनमें से बहुतों से प्रसन्न ना था, इसलिए वे जंगल में ढेर हो गए। (इब्रा. 3:17)

6 ये बातें हमारे लिये दृष्टान्त ठहरीं, कि जैसे उन्होंने लालच किया, वैसे हम बुरी वस्तुओं का लालच न करें। 7 और न तुम मूरत पूजनेवाले बनो; जैसे कि उनमें से कितने बन गए थे, जैसा लिखा है, "लोग खाने-पीने बैठे, और खेलने-कूदने उठे।" 8 और न हम व्यभिचार करें; जैसा उनमें से कितनों ने किया और एक दिन में तेईस हजार मर गये। (गिन. 25:1, गिन. 25:9) 9 और न हम प्रभु को परखें; जैसा उनमें से कितनों ने किया, और साँपों के द्वारा नाश किए गए। (गिन. 21:5-6) 10 और न तुम कुड़कुड़ाओ, जिस रीति से उनमें से कितने कुड़कुड़ाए, और नाश करनेवाले के द्वारा नाश किए गए। 11 परन्तु ये सब बातें, जो उन पर पड़ीं, दृष्टान्त की रीति पर थीं; और वे हमारी चेतावनी के लिये जो जगत के अन्तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं। 12 इसलिए जो समझता है, "मैं स्थिर हूँ," वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े। 13 तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने के बाहर है: और परमेश्वर विश्वासयोग्य है: वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन् परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। (2 पत. 2:9)

मूर्तिपूजा वर्जित

14 इस कारण, हे मेरे प्यारों मूर्तिपूजा से बचे रहो10:14 मूर्तिपूजा से बचे रहो: मंदिरों से, जहाँ मूर्तियों की पूजा होती है, उनकी सेवा करने से बचो।। 15 मैं बुद्धिमान जानकर, तुम से कहता हूँ: जो मैं कहता हूँ, उसे तुम परखो। 16 वह धन्यवाद का कटोरा10:16 धन्यवाद का कटोरा: प्रभु भोज में भाग लेने के द्वारा, वे उन्हें अपने प्रभु के रूप में स्वीकार करते हैं, और वे अपने आपको उन्हें समर्पित करते हैं।, जिस पर हम धन्यवाद करते हैं, क्या वह मसीह के लहू की सहभागिता नहीं? वह रोटी जिसे हम तोड़ते हैं, क्या मसीह की देह की सहभागिता नहीं? 17 इसलिए, कि एक ही रोटी है तो हम भी जो बहुत हैं, एक देह हैं क्योंकि हम सब उसी एक रोटी में भागी होते हैं। 18 जो शरीर के भाव से इस्राएली हैं, उनको देखो: क्या बलिदानों के खानेवाले वेदी के सहभागी नहीं? 19 फिर मैं क्या कहता हूँ? क्या यह कि मूर्ति का बलिदान कुछ है, या मूरत कुछ है? 20 नहीं, बस यह, कि अन्यजाति जो बलिदान करते हैं, वे परमेश्वर के लिये नहीं, परन्तु दुष्टात्माओं के लिये बलिदान10:20 दुष्टात्माओं के लिये बलिदान: यह आमतौर पर आत्माओं को संदर्भित करता है कि सर्वोच्च परमेश्वर को नीचा दिखाएँ। करते हैं और मैं नहीं चाहता, कि तुम दुष्टात्माओं के सहभागी हो। (व्यव. 32:17) 21 तुम प्रभु के कटोरे, और दुष्टात्माओं के कटोरे दोनों में से नहीं पी सकते! तुम प्रभु की मेज और दुष्टात्माओं की मेज दोनों के सहभागी नहीं हो सकते। (मत्ती 6:24) 22 क्या हम प्रभु को क्रोध दिलाते हैं? क्या हम उससे शक्तिमान हैं? (व्यव. 32:21)

मसीही स्वतंत्रता

23 सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित तो हैं, परन्तु सब लाभ की नहीं। सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित तो हैं, परन्तु सब वस्तुओं से उन्नति नहीं। 24 कोई अपनी ही भलाई को न ढूँढ़े वरन् औरों की। 25 जो कुछ कसाइयों के यहाँ बिकता है, वह खाओ और विवेक के कारण कुछ न पूछो। 26 "क्योंकि पृथ्वी और उसकी भरपूरी प्रभु की है।" (भज. 24:1) 27 और यदि अविश्वासियों में से कोई तुम्हें नेवता दे, और तुम जाना चाहो, तो जो कुछ तुम्हारे सामने रखा जाए वही खाओ: और विवेक के कारण कुछ न पूछो। 28 परन्तु यदि कोई तुम से कहे, "यह तो मूरत को बलि की हुई वस्तु है," तो उसी बतानेवाले के कारण, और विवेक के कारण न खाओ। 29 मेरा मतलब, तेरा विवेक नहीं, परन्तु उस दूसरे का। भला, मेरी स्वतंत्रता दूसरे के विचार से क्यों परखी जाए? 30 यदि मैं धन्यवाद करके सहभागी होता हूँ, तो जिस पर मैं धन्यवाद करता हूँ, उसके कारण मेरी बदनामी क्यों होती है?

31 इसलिए तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिये करो। 32 तुम न यहूदियों, न यूनानियों, और न परमेश्वर की कलीसिया के लिये ठोकर के कारण10:32 ठोकर के कारण: निरापराध रहो, वह यह है कि पाप में दूसरों का नेतृत्व करने के जैसा काम मत करो। बनो। 33 जैसा मैं भी सब बातों में सब को प्रसन्न रखता हूँ, और अपना नहीं, परन्तु बहुतों का लाभ ढूँढ़ता हूँ, कि वे उद्धार पाएँ।

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