10 क्योंकि यदि कोई तुझ ज्ञानी को मूरत के मन्दिर में भोजन करते देखे, और वह निर्बल जन हो, तो क्या उसके विवेक में मूरत के सामने बलि की हुई वस्तु के खाने का साहस न हो जाएगा। 11 इस रीति से तेरे ज्ञान के कारण वह निर्बल भाई जिसके लिये मसीह मरा नाश हो जाएगा। 12 तो भाइयों का अपराध करने से और उनके निर्बल विवेक को चोट देने से तुम मसीह का अपराध करते हो। 13 इस कारण यदि भोजन मेरे भाई को ठोकर खिलाएँ, तो मैं कभी किसी रीति से माँस न खाऊँगा, न हो कि मैं अपने भाई के ठोकर का कारण बनूँ।
1 कुरिन्थियों 8:10-13
Em outras traduções
- OHSS Hindi Contemporary Version
10 यदि किसी का विवेक कमजोर है और वह तुम जैसे ज्ञानी व्यक्ति को मूर्ति के मंदिर में भोजन करते देख ले तो क्या उसे भी मूर्ति को चढ़ाई हुई वस्तुएं खाने का साहस न मिलेगा? 11 इसमें तुम्हारा ज्ञानी होना उसके विनाश का कारण हो गया, जिसके लिए मसीह येशु ने प्राण दिया. 12 इस प्रकार विश्वासियों के विरुद्ध पाप करने तथा उनके विवेक को, जो कमजोर हैं, चोट पहुंचाने के द्वारा तुम मसीह येशु के विरुद्ध पाप करते हो. 13 इसलिये यदि भोजन किसी के लिए ठोकर का कारण बनता है तो मैं मांस का भोजन कभी न करूंगा कि मैं विश्वासियों के लिए ठोकर का कारण न बनूं.
- HSB Hindi Standard Bible
10 यदि कोई तुझे, जिसको यह ज्ञान है, मूर्ति के मंदिर में भोजन करते देख ले, तो क्या उसके निर्बल विवेक को मूर्तियों को चढ़ाया हुआ भोजन खाने का साहस न होगा? 11 और तेरे इस ज्ञान के कारण वह निर्बल जन अर्थात् वह भाई नाश हो जाएगा जिसके लिए मसीह मरा। 12 इस प्रकार भाइयों के विरुद्ध पाप करने और उनके निर्बल विवेक को ठेस पहुँचाने के द्वारा तुम मसीह के विरुद्ध पाप करते हो। 13 इसलिए यदि भोजन मेरे भाई के लिए ठोकर का कारण बनता है, तो मैं कभी मांस नहीं खाऊँगा, ऐसा न हो कि मैं अपने भाई के लिए ठोकर का कारण बनूँ।
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