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2 Coríntios 10

आति

1 ैं वहमनूँ, परनओर हस करतूँ; मसनमरता, और मलत10:1 मसीह की नम्रता, और कोमलता: नम्रता और उद्धारकर्ता की दयालुता; या उसकी नम्रता और सौम्यता की अनुसरण करने की इच्छा। रण समझूँ। 2 ैं यह िनतकरतूँ, ि मनिभय कर हस करनपड़े; ैं ितनों पर हमकशरअनचलनसमझतैं, रतििकरतूँ। 3 ोंि यदयपि हम शरें चलतिरतैं, शरअननहीं लडे। 4 ोंि हमलड़ाहथििनहीं, पर गढ़ों िपरमवर मरैं। 5 हम कलपनो, और हर एक ो, परमवर पहचिें उठतै, खणडन करतैं; और हर एक वनकरकमसआजबनैं। 6 और रहतैं ि जब आजनन, हर एक रकआजननपलटें।

अधि

7 इनीं ों खतो, ों मनैं, यदि िअपनपर यह भरो, ि ैं मसूँ, वह यह े, ि वह मसै, हम ैं। 8 ोंि यदि ैं उस अधििषय ें और घमणिँ, रभििनहीं पर बनिहमें िै, लजिा। 9 यह ैं इसलिकहतूँ, ि पतिों ें डरठहरूँ। 10 ोंि कहतैं, "उसकपतिाँ गमऔर रभवशैं; परनजब खतैं, कहतवह िबल और वकतवें हलकपडै।" 11 इसलिऐसकहतै, ि वह यह समझ रखे, ि पतिों ें हमवचन ैं, मनहमोंे।

अधि

12 ोंि हमें यह हस नहीं ि हम अपनआपकउनकिें, उनसअपनिँ, अपनरशकरतैं, और अपनआपकआपस ें लकर एक सरलनकरकठहरतैं।

13 हम हर घमणकदि करेंे, परनउसतक परमवर हमिठहरै, और उसमें गए और उसअनघमणकरेंे। 14 ोंि हम अपनहर अपनआपकबढ़ानहीं हते, ि तक पहुँचनदशें ा, वरनमससमतक पहुँैं। 15 और हम हर औरों परिरम पर घमणनहीं करते; परनहमें आशै, ि ों-ों िबढएगों-ों हम अपनअनरण और बढे। 16 ि हम आगबढकर समँ, और यह नहीं, ि हम औरों तर बनबनों पर घमणकरें।

17 परनघमणकरे, वह रभपर घमणकरे। (1 ि. 1:31, ि. 9:24)

18 ोंि अपनबड़ाकरतै, वह नहीं, परनिसकबड़ारभकरतै, वहरहण िै।

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