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2 पतरस 1

भकमन

1 शमपतरस और मसऔर िै, उन ों िोंहमपरमवर और उदरकरमसिकतहमबहििै।

2 परमवर और हमरभपहचअनरह और ि 1:2 परमेश्वर के .... अनुग्रह और शान्ति: अनुग्रह और शान्ति हमारे लिए भरपूर मात्रा में हैं या बहुतायत से हम पर प्रदत्त होने की उम्मीद की जा सकती है, यदि हमें परमेश्वर की और उद्धारकर्ता का सच्चा ज्ञान है। ें बहयत बढ

िें उननति

3 ोंि उसकईशवरमरसब वन और भकि समरखतै, हमें उसपहचिै, िसनहमें अपनमहिऔर सदअनै। 4 िनकउसनहमें बहऔर बहबड़ी रतिैं ि इनकउस सड़ाहट टकर ें अभिै, ईशवरवभसहभ5 और इसरण सब रकयतकरके, अपनिपर सद, और सदपर समझ, 6 और समझ पर यम, और यम पर रज, और रज पर भकि, 7 और भकि पर ईचि, और ईचि पर बढ़ा8 ोंि यदि ें ें वरतमरहें, और बढँ, ें हमरभमसपहचें िकमऔर िफल ेंी। 9 ोंि िसमें ें नहीं, वह ै, और धलखत1:9 वह अंधा है, और धुन्धला देखता है: मतलब आँखें बन्द करना, जैसे वह एक जो स्पष्ट नहीं देख सकता और "पास दृष्टिवाला" हैं।, और अपनवकों लकर ै। 10 इस रण इयों, अपने, और ििकरनभलाँि यतकरत, ोंि यदि ऐसकरे, कभकर ओगे; 11 वरनइस ि हमरभऔर उदरकरमसअननें बड़े आदर रवकरनओगे।

पतरस अनिसमय

12 इसलियदयपि ें नतो, और सतवचन ें िै, उसमें बनरहतो, ैं ें इन ों ि िसरवदरहूँा। 13 और ैं यह अपनिउचिसमझतूँ, ि जब तक ैं इस ें ूँ, तब तक ें ि िकर उभरतरहूँ। 14 ोंि यह नतूँ, ि मसवचन अनिसमय आनै, ि हमरभमसपर रकट िै। 15 इसलिैं ऐसयतकरूँा, ि इन सब ों सरवदमरण कर सको।

मसमहिदरशन

16 ोंि जब हमनें अपनरभमसमरा, और आगमन समिवह चतगढ़ी कहिों अनकरण नहीं िवरनहमनआप उसकरता। 17 ि उसनपरमवर िआदर, और महिजब उस रतपमय महिें यह आई "यह िै, िससैं रसनूँ।" (भज. 2:7, यशा. 42:1) 18 और जब हम उसकपविपहपर े, वरयहआती। 19 और हमभवियदवकवचन ै, वह इस घटनठहरऔर यह अचकरतो, ि यह समझकर उस पर करतो, ि वह एक ै, िें उस समय तक रकरहतजब तक ि फटे, और दयों ें चमक उठे। 20 पर पहलयह ि पविरशभवियदिअपनिरधआधपर नहीं ी। 21 ोंि भवियदमनइचकभनहीं पर भकजन पविआतउभकर परमवर ओर लते।

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