6 परन्तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा। (नीति. 11:24, नीति. 22:9) 7 हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे; न कुढ़-कुढ़ के, और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है। (व्यव. 18:10, नीति. 22:9, नीति. 11:25) 8 परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है9:8 परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है: यह मत समझो कि उदारतापूर्वक देने के द्वारा आपकी जरुरत कम हो जाएगी, बल्कि परमेश्वर में भरोसा रखें कि वह हमारे भविष्य की जरूरतों के लिए आपूर्ति करेंगे।। जिससे हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो। 9 जैसा लिखा है,
"उसने बिखेरा, उसने गरीबों को दान दिया,
उसकी धार्मिकता सदा बनी रहेगी।" (भज. 112:9)
10 अतः जो बोनेवाले को बीज, और भोजन के लिये रोटी देता है वह तुम्हें बीज देगा, और उसे फलवन्त करेगा; और तुम्हारे धार्मिकता के फलों को बढ़ाएगा। (यशा. 55:10, होशे 10:12) 11 तुम हर बात में सब प्रकार की उदारता के लिये जो हमारे द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करवाती है, धनवान किए जाओ। 12 क्योंकि इस सेवा के पूरा करने से, न केवल पवित्र लोगों की घटियाँ पूरी होती हैं, परन्तु लोगों की ओर से परमेश्वर का बहुत धन्यवाद होता है।