एलीशा का एक और आश्चर्यकर्म
1 भविष्यद्वक्ताओं के दल में से किसी ने एलीशा से कहा, "यह स्थान जिसमें हम तेरे सामने रहते हैं, वह हमारे लिये बहुत छोटा है। 2 इसलिए हम यरदन तक जाएँ, और वहाँ से एक-एक बल्ली लेकर, यहाँ अपने रहने के लिये एक स्थान बना लें;" उसने कहा, "अच्छा जाओ।" 3 तब किसी ने कहा, "अपने दासों के संग चल;" उसने कहा, "चलता हूँ।" 4 अतः वह उनके संग चला और वे यरदन के किनारे पहुँचकर लकड़ी काटने लगे। 5 परन्तु जब एक जन बल्ली काट रहा था, तो कुल्हाड़ी बेंट से निकलकर जल में गिर गई; इसलिए वह चिल्लाकर कहने लगा, "हाय! मेरे प्रभु, वह तो माँगी हुई थी।" 6 परमेश्वर के भक्त ने पूछा, "वह कहाँ गिरी?" जब उसने स्थान दिखाया, तब उसने एक लकड़ी काटकर वहाँ डाल दी, और वह लोहा पानी पर तैरने लगा। 7 उसने कहा, "उसे उठा ले।" तब उसने हाथ बढ़ाकर उसे ले लिया।