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Atos 2

पविआतआगमन

1 जब िि आया, सब एक जगह इकटे। (. 23:15-21, यव. 16:9-11) 2 और अचनक आकबड़ी समसनसनहट शब, और उससघर जहाँ े, ूँगया। 3 और उनें आग समें फटतिऔर उनमें हर एक पर ठहरी। 4 और सब पविआतभर गए, और िरकआतउनें लनमरी, अनय-अनलनलगे।

5 और आकहर एक ि ें भकत-यहयरशलें रहते। 6 जब वह शबिा, लग गई और घबरगए, ोंि हर एक यहा, ि ें रहैं। 7 और सब चकिऔर अचमिकर कहनलगे, "ो, रहैं सब गलनहीं? 8 िों हम ें े; हर एक अपनी-अपनजनम-भि नतै? 9 हम रथी, ी, एल, िा, यहिा, कपपदिा, और आसिा, 10 और िऔर िऔर िऔर िआस-पै, इन सब ों रहनऔर रवी, 11 अरयही, और यहमत रण करने, और अरबैं, परनअपनी-अपनें उनसपरमवर बड़े-बड़े ों चरनतैं।" 12 और सब चकि, और घबरकर एक सरकहनलगे, "यह रहै?" 13 परनसरों उपहकरककहा, "नई मदिनशें ैं।"

ििपतरस षण

14 पतरस उन रह खड़ा और शबकहनलगा, "यहिों, और यरशलसब रहनों, यह और लगकर ें ो। 15 समझ रहो, नशें नहीं ैं, ोंि अभसरपहर िचढ़ा ै। 16 परनयह वह ै, एल भवियदवककहगई ै:

17 परमवर कहतै, ि अनिों ें ऐसा, ि

ैं अपनआतसब मनों पर उणूँऔर

और िाँ भवियदकरेंी,

और जवदरशन ेंे,

और वपेंे।

18 वरनैं अपनों और अपनिों पर उन िों

ें अपनआतउणूँा, और भवियदकरेंे।

19 और ैं ऊपर आकें अद,

और धरतपर ि, अर

लहू, और आग और दल िा।

20 रभमहऔर जसि आनपहल

और ाँलहएगा।

21 और रभा, वहउदएगा।’ (. 2:28-32)

22 "इसएलिों, ें ि सरएक मनिसकपरमवर ओर रमउन मरों और आशचरों और िों रगट ै, परमवर उसककर िखलिआप नतो। 23 उसो, जब वह परमवर ठहरजनऔर अनपकडगया, अधरिों उसपर चढकर ा। 24 परनउसपरमवर बनधनों ़ाकर िा: ोंि यह अनहि वह उसकवश ें रहता। (2 शमू. 22:6, भज. 18:4, भज. 116:3) 25 ोंि ऊद उसकिषय ें कहतै,

ैं रभसरवदअपनमनखतरह

ोंि वह िओर ै, ि ैं िँ।

26 इसरण मन आननि, और मगन ;

वरनशरआशें बनरहा।

27 ोंि ों अधें ़ेा;

और अपनपविजन सडा!

28 वन बतै;

अपनदरशन आननभर ा।’ (भज. 16:8-11)

29 "इयों, ैं उस लपति ऊद िषय ें हस कह सकतूँ ि वह मर गयऔर ़ा गयऔर उसककबआज तक हमयहाँ वरतमै। (1 ा. 2:10) 30 वह भवियदवका, वह नति परमवर उससशपथ ै, ैं ें एक यकि िंसन पर ा। (2 शमू. 7:12,13, भज. 132:11) 31 उसनपहलखकर मसउठनिषय ें भवियदी,

ि उसकअधें ़ा गया, और उसकसड(भज. 16:10)

32 "इसपरमवर िा, िसकहम सब गवैं। 33 इस रकपरमवर िसरपद कर, और िवह पविआतकरकिसकरतिगई ी, उसनयह उणिखतऔर नतो। 34 ोंि ऊद वरपर नहीं चढ़ा; परनवह वयकहतै,

रभरभकहा; ि,

35 जब तक ि ैं िों ाँों तलकर ूँ।’" (भज. 110:1)

36 "अतअब इसएल घरिचय ि परमवर उसिपर चढ़ाा, रभठहरऔर मसी।"

37 तब ननों दय िगए, और पतरस और अनिों छनलगे, "इयों, हम करें?" 38 पतरस उनसकहा, "मन ि, और ें हर एक अपने-अपनों षमिमसबपतिे; पविआतओगे। 39 ोंि यह रति, और सनों, और उन सब र-दों ििनकरभहमपरमवर अपनएगा।" (. 2:32) 40 उसनबहऔर ों गवकर समझि अपनआपकइस ़ी ि बच(यव. 32:5, भज. 78:8) 41 अतिोंउसकवचन रहण िउनोंबपतििा; और उसिहजमनों लगभग उनमें िगए

ििों वन

42 और िों िे, और गति रखनें और ें और थनकरनें रहे। 43 और सब ों पर भय गया, और बहअदऔर ििों रगट े। 44 और सब िकरनइकटरहते, और उनकसब वसीं। 45 और अपनी-अपनसमपति और च-बचकर िसकआवशयकताँिकरते। 46 और रतििएक मन कर मनिें इकटे, और घर-घर आननऔर मन िजन िकरते। 47 और परमवर ि करते, और सब उनसरसने; और उदे, उनकरभरतििउनमें िा।

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