11उसी का साम्राज्य युगानुयुग रहे। आमीन।
14प्रेम से चुम्बन लेकर एक दूसरे को नमस्कार करो।तुम सब को जो मसीह में हो शान्ति मिलती रहे।
14 resultados encontrados
11उसी का साम्राज्य युगानुयुग रहे। आमीन।
14प्रेम से चुम्बन लेकर एक दूसरे को नमस्कार करो।तुम सब को जो मसीह में हो शान्ति मिलती रहे।
1भाईचारे का प्रेम बना रहे।
24अपने सब अगुओं और सब पवित्र लोगों को नमस्कार कहो। इतालियावाले तुम्हें नमस्कार कहते हैं।
25तुम सब पर अनुग्रह होता रहे। आमीन।
4प्रेम धीरजवन्त है, और कृपालु है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
8प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियाँ हों, तो समाप्त हो जाएँगी, भाषाएँ मौन हो जाएँगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।
13पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थायी13:13 स्थायी: यह "नित्यता" को दर्शाता है, जब अन्य सब बातें समाप्त हो जाएँगी, विश्वास, आशा, और प्रेम "स्थायी" रहेंगे। हैं, पर इनमें सबसे बड़ा प्रेम है।
14जो कुछ करते हो प्रेम से करो।
22यदि कोई प्रभु से प्रेम न रखे तो वह शापित हो। हे हमारे प्रभु, आ!
24मेरा प्रेम मसीह यीशु में16:24 मसीह यीशु में: मसीह यीशु के माध्यम से; या यीशु मसीह में तुम्हारे प्रेम के सम्बंध के द्वारा। तुम सब के साथ रहे। आमीन।
2अमर्याह, मल्लूक, हत्तूश,
15हारीम का अदना; मरायोत का हेलकै।
20सल्लै का कल्लै; आमोक का एबेर।
9प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो। (आमो. 5:15)
10भाईचारे के प्रेम12:10 भाईचारे के प्रेम: यह शब्द भाइयों के बीच रहने के स्नेह को दर्शाता है। से एक दूसरे पर स्नेह रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
15आनन्द करनेवालों के साथ आनन्द करो, और रोनेवालों के साथ रोओ। (भज. 35:13)
7हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है और परमेश्वर को जानता है।
16और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस पर विश्वास है। परमेश्वर प्रेम है; जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उसमें बना रहता है।
18प्रेम में भय नहीं होता4:18 प्रेम में भय नहीं होता: प्रेम एक मनोवेग नहीं हैं जो भय पैदा करता हैं, यदि मनुष्य को परमेश्वर के लिये सम्पूर्ण प्रेम हैं, तो उन्हें किसी भी बात का भय नहीं होगा।, वरन् सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय का सम्बंध दण्ड से होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।
5खुली हुई डाँट गुप्त प्रेम से उत्तम है।
9जैसे तेल और सुगन्ध से,वैसे ही मित्र के हृदय की मनोहर सम्मति से मन आनन्दित होता है।
10जो तेरा और तेरे पिता का भी मित्र हो उसे न छोड़ना;और अपनी विपत्ति के दिन, अपने भाई के घर न जाना।प्रेम करनेवाला पड़ोसी, दूर रहनेवाले भाई से कहीं उत्तम है27:10 प्रेम करनेवाला पड़ोसी, दूर रहनेवाले भाई से कहीं उत्तम है: वास्तव में, मन और आत्मा के निकट रहनेवाला पड़ोसी उससे बेहतर है जो रिश्ते में भाई तो है परन्तु भावनाओं में दूर है।।
2जन्म का समय, और मरण का भी समय;बोने का समय; और बोए हुए को उखाड़ने का भी समय है;
4रोने का समय, और हँसने का भी समय;छाती पीटने का समय, और नाचने का भी समय है;
8प्रेम करने का समय, और बैर करने का भी समय;लड़ाई का समय, और मेल का भी समय है।
4पर जब हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर की भलाई, और मनुष्यों पर उसका प्रेम प्रकट हुआ
6जिसे उसने हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह के द्वारा हम पर अधिकाई से उण्डेला। (योए. 2:28)
15मेरे सब साथियों का तुझे नमस्कार और जो विश्वास के कारण हम से प्रेम रखते हैं, उनको नमस्कार।तुम सब पर अनुग्रह होता रहे।
29बाला, इय्यीम, एसेम,
50अनाब, एश्तमो, आनीम,
52फिर अराब, दूमा, एशान,
1हे स्त्रियों में परम सुन्दरी,तेरा प्रेमी कहाँ गया?तेरा प्रेमी कहाँ चला गयाकि हम तेरे संग उसको ढूँढ़ने निकलें?वधू
3मैं अपने प्रेमी की हूँ और मेरा प्रेमी मेरा है,वह अपनी भेड़-बकरियाँ सोसन फूलों के बीच चराता है।वर
7तेरे कपोल तेरी लटों के नीचेअनार की फाँक से देख पड़ते हैं।
5क्योंकि मैं तेरे उस प्रेम और विश्वास की चर्चा सुनकर, जो प्रभु यीशु पर और सब पवित्र लोगों के साथ है।
7क्योंकि हे भाई, मुझे तेरे प्रेम से बहुत आनन्द और शान्ति मिली है, इसलिए, कि तेरे द्वारा पवित्र लोगों के मन हरे भरे हो गए हैं।
25हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम्हारी आत्मा पर होता रहे। आमीन।
3हसर्शूआल, बाला, एसेम,
36अदामा, रामाह, हासोर,
43एलोन, तिम्नाह, एक्रोन,