मूसा का जन्म
1 लेवी के घराने के एक पुरुष ने एक लेवी वंश की स्त्री को ब्याह लिया। 2 वह स्त्री गर्भवती हुई और उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ; और यह देखकर कि यह बालक सुन्दर है, उसे तीन महीने तक छिपा रखा। (प्रेरि. 7:20, इब्रा. 11:23) 3 जब वह उसे और छिपा न सकी तब उसके लिये सरकण्डों की एक टोकरी2:3 सरकण्डों की एक टोकरी: मिस्री लोग सरकण्डों का प्रयोग साधारणतः हलकी और तेज नाव बनाने के लिए करते थे। लेकर, उस पर चिकनी मिट्टी और राल लगाकर, उसमें बालक को रखकर नील नदी के किनारे कांसों के बीच छोड़ आई। 4 उस बालक की बहन दूर खड़ी रही, कि देखे उसका क्या हाल होगा।
5 तब फ़िरौन की बेटी नहाने के लिये नदी के किनारे आई; उसकी सखियाँ नदी के किनारे-किनारे टहलने लगीं; तब उसने कांसों के बीच टोकरी को देखकर अपनी दासी को उसे ले आने के लिये भेजा। (प्रेरि. 7:21) 6 तब उसने उसे खोलकर देखा कि एक रोता हुआ बालक है; तब उसे तरस आया2:6 उसे तरस आया: उसकी भावनाओं का ज़िक्र करने का विशेष कारण है, क्योंकि इसी के कारण उस राजकुमारी ने अपने पिता की आज्ञा के बावजूद उस बालक को बचाया और उसे गोद लिया। और उसने कहा, "यह तो किसी इब्री का बालक होगा।" 7 तब बालक की बहन ने फ़िरौन की बेटी से कहा, "क्या मैं जाकर इब्री स्त्रियों में से किसी धाई को तेरे पास बुला ले आऊँ जो तेरे लिये बालक को दूध पिलाया करे?" 8 फ़िरौन की बेटी ने कहा, "जा।" तब लड़की जाकर बालक की माता को बुला ले आई। 9 फ़िरौन की बेटी ने उससे कहा, "तू इस बालक को ले जाकर मेरे लिये दूध पिलाया कर, और मैं तुझे मजदूरी दूँगी।" तब वह स्त्री बालक को ले जाकर दूध पिलाने लगी। 10 जब बालक कुछ बड़ा हुआ तब वह उसे फ़िरौन की बेटी के पास ले गई, और वह उसका बेटा ठहरा; और उसने यह कहकर उसका नाम मूसा2:10 मूसा: राजकुमारी ने बालक का नाम मूसा, अर्थात् "पुत्र" या "निकाला हुआ" रखा, क्योंकि उसने उसे पानी में से निकाला था। रखा, "मैंने इसको जल से निकाला था।"