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निर्गमन 20:3-11

3 "तू मुझे छोड़20:3 मुझे छोड़: इसका अर्थ था कि यहोवा के अतिरिक्त किसी और को ईश्वर न मानना। दूसरों को परमेश्वर करके न मानना।

4 "तू अपने लिये कोई मूर्ति20:4 मूर्ति: पहली आज्ञा किसी भी दृश्य या अदृश्य झूठे देवता को ईश्वर करके मानने की मनाही करता है, यहाँ किसी भी तरह की मूर्ति की उपासना करने को वर्जित ठहराया गया है। खोदकर न बनाना, न किसी की प्रतिमा बनाना, जो आकाश में, या पृथ्वी पर, या पृथ्वी के जल में है। 5 तू उनको दण्डवत् न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखनेवाला परमेश्वर हूँ, और जो मुझसे बैर रखते हैं, उनके बेटों, पोतों, और परपोतों को भी पितरों का दण्ड दिया करता हूँ, 6 और जो मुझसे प्रेम रखते और मेरी आज्ञाओं को मानते हैं, उन हजारों पर करुणा किया करता हूँ।

7 "तू अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष न ठहराएगा।

8 "तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना20:8 विश्रामदिन को .... स्मरण रखना: शब्द स्मरण रखना का अभिप्राय अपने मन में रखना भी हो सकता है।। 9 छः दिन तो तू परिश्रम करके अपना सब काम-काज करना; 10 परन्तु सातवाँ दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है। उसमें न तो तू किसी भाँति का काम-काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो। 11 क्योंकि छः दिन में यहोवा ने आकाश और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उनमें है, सब को बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।

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