साक्षीपत्र का सन्दूक
10 "बबूल की लकड़ी का एक सन्दूक बनाया जाए; उसकी लम्बाई ढाई हाथ, और चौड़ाई और ऊँचाई डेढ़-डेढ़ हाथ की हो। 11 और उसको शुद्ध सोने से भीतर और बाहर मढ़वाना, और सन्दूक के ऊपर चारों ओर सोने की बाड़ बनवाना। 12 और सोने के चार कड़े ढलवा कर उसके चारों पायों पर, एक ओर दो कड़े और दूसरी ओर भी दो कड़े लगवाना। 13 फिर बबूल की लकड़ी के डंडे बनवाना, और उन्हें भी सोने से मढ़वाना। 14 और डंडों को सन्दूक की दोनों ओर के कड़ों में डालना जिससे उनके बल सन्दूक उठाया जाए। 15 वे डंडे सन्दूक के कड़ों में लगे रहें; और उससे अलग न किए जाएँ25:15 उससे अलग न किए जाएँ: यह निर्देश सम्भवतः इसलिए दिया गया कि सन्दूक को हाथों से छूआ न जाए। ।