17 "फिर शुद्ध सोने का एक प्रायश्चित का ढकना बनवाना; उसकी लम्बाई ढाई हाथ, और चौड़ाई डेढ़ हाथ की हो। 18 और सोना ढालकर दो करूब बनवाकर प्रायश्चित के ढकने के दोनों सिरों पर लगवाना। 19 एक करूब तो एक सिरे पर और दूसरा करूब दूसरे सिरे पर लगवाना; और करूबों को और प्रायश्चित के ढकने को उसके ही टुकड़े से बनाकर उसके दोनों सिरों पर लगवाना। 20 और उन करूबों के पंख ऊपर से ऐसे फैले हुए बनें कि प्रायश्चित का ढकना उनसे ढँपा रहे, और उनके मुख आमने-सामने और प्रायश्चित के ढकने की ओर रहें। 21 और प्रायश्चित के ढकने को सन्दूक के ऊपर लगवाना; और जो साक्षीपत्र मैं तुझे दूँगा उसे सन्दूक के भीतर रखना।
निर्गमन 25:17-21
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- OHSS Hindi Contemporary Version
17 "सोने से करुणासन25:17 करुणासन संदूक का ढकना जिसे मूल भाषा में प्रायश्चित का ढकना; अर्थात् पापों को ढांपने का स्थान कहलाता था बनाना, जो एक सौ दस सेंटीमीटर लंबा तथा सत्तर सेंटीमीटर चौड़ा होगा. 18 सोने के पत्रों से दो करूबों को बनाकर करुणासन के दोनों ओर लगाना. 19 एक करूब एक तरफ तथा दूसरा करूब दूसरी तरफ लगाना. ये करूब करुणासन के साथ ऐसे जुड़े हों, मानो यह एक ही हो. 20 करूबों के पंख ऊपर से ऐसे खुले हों जिससे करुणासन उनसे ढका रह सके और वे एक दूसरे के आमने-सामने तथा उनके मुंह करुणासन की ओर झुके हुए हों. 21 करुणासन को संदूक के ऊपर लगाना और साक्षी पट्टिया जो मैं तुम्हें दूंगा उसे संदूक के अंदर रखना.
- HSB Hindi Standard Bible
17 "फिर शुद्ध सोने का एक प्रायश्चित्त का ढक्कना बनवाना; उसकी लंबाई ढाई हाथ, और चौड़ाई डेढ़ हाथ की हो। 18 तू सोने के दो करूब गढ़कर बनवाना, और उन्हें प्रायश्चित्त के ढक्कने के दोनों सिरों पर लगवाना। 19 एक करूब को एक सिरे पर और दूसरे करूब को दूसरे सिरे पर लगवाना; तथा प्रायश्चित्त के ढक्कने को और करूबों को एक ही टुकड़े से बनवाना कि वे उसके दोनों सिरों पर हों। 20 उन करूबों के पंख ऊपर से ऐसे फैले हुए हों कि प्रायश्चित्त का ढक्कना उनसे ढका रहे, और उनके मुँह आमने-सामने और प्रायश्चित्त के ढकने की ओर हों। 21 प्रायश्चित्त के ढक्कने को संदूक के ऊपर लगवाना; और जो साक्षीपत्र मैं तुझे दूँगा उसे संदूक में रखना।
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