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फिलिप्पियों 2:3-8

IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

3 स्वार्थ या मिथ्यागर्व के लिये कुछ न करो, पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 4 हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन् दूसरों के हित की भी चिन्ता करे।

मसीह की दीनता और महानता

5 जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो;

6 जिसने परमेश्वर के स्वरूप में होकर भी

परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में

रखने की वस्तु न समझा।

7 वरन् अपने आपको ऐसा शून्य कर दिया2:7 अपने आपको ऐसा शून्य कर दिया: यह उन मामले में प्रयुक्त है जहाँ कोई अपनी प्रतिष्ठा और महिमा को एक तरफ अपने से अलग कर देता है और उनके लिये अप्रतिष्ठित बन जाता हैं।,

और दास का स्वरूप धारण किया,

और मनुष्य की समानता में हो गया।

8 और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर

अपने आपको दीन किया, और यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु, हाँ,

क्रूस की मृत्यु भी सह ली।

Em outras traduções

  1. OHSS Hindi Contemporary Version

    3 स्वार्थ और झूठी बड़ाई से कुछ भी न करो, परंतु विनम्रता के साथ तुममें से प्रत्येक अपनी बजाय दूसरे को श्रेष्ठ समझे. 4 तुममें से हर एक सिर्फ अपनी ही भलाई का नहीं परंतु दूसरों की भलाई का भी ध्यान रखे.

    5 तुम्हारा स्वभाव वैसा ही हो, जैसा मसीह येशु का था:

    6 जिन्होंने परमेश्वर के स्वरूप में होते हुए भी,

    परमेश्वर से अपनी तुलना पर अपना अधिकार बनाए रखना सही न समझा;

    7 परंतु अपने आपको शून्य कर,

    दास का स्वरूप धारण करते हुए,

    और मनुष्य की समानता में हो गया.

    8 और मनुष्य के शरीर में प्रकट होकर,

    अपने आपको दीन करके मृत्यु—

    क्रूस की मृत्यु तक,

    आज्ञाकारी रहकर स्वयं को शून्य बनाया.

  2. HSB Hindi Standard Bible

    3 स्वार्थ से या अहंकार से कुछ न करो, बल्कि दीनता से दूसरों को अपने से श्रेष्‍ठ समझो, 4 प्रत्येक व्यक्‍ति अपने हित का ही नहीं, बल्कि दूसरों के हित का भी ध्यान रखे।

    5 तुममें वही स्वभाव हो जो मसीह यीशु में था, 6 जिसने परमेश्‍वर के स्वरूप में होते हुए भी परमेश्‍वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा, 7 बल्कि अपने को शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप लेकर मनुष्य की समानता में हो गया। 8 उसने मनुष्य रूप में प्रकट होकर अपने आपको दीन किया, और यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु, हाँ क्रूस की मृत्यु भी सह ली।

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