26 फिर परमेश्वर ने कहा, "हम मनुष्य1:26 मनुष्य: मनुष्य नई प्रजाति है, वह विशेष रूप से इस पृथ्वी के अन्य प्रकार के जीवों से भिन्न है। को अपने स्वरूप के अनुसार1:26 अपने स्वरूप के अनुसार: अर्थात् अपनी समानता में। मनुष्य का स्वर्ग से सम्बंध है और इस पृथ्वी का कोई भी प्राणी नहीं है अपनी समानता में बनाएँ; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।" (याकू. 3:9)