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उत्पत्ति 30

1 जब ि िझससननहीं ी, तब वह अपनबहन करनलगऔर कहा, "सने, नहीं मर ी।" 2 तब िकर कहा, "ैं परमवर ूँ? उसबनकर रखै।" 3 कहा, "अचा, ििै; उसा, वह टनों पर जनी, और उसकघर बसा।" 4 तब उसनउसअपनििा, ि वह उसकपतो; और उसकगया। 5 और िगरभवतऔर उसकएक उतपन6 तब कहा, "परमवर और नकर एक िा।" इसलिउसनउसकरखा। 7 ििगरभवतऔर एक और उतपन8 तब कहा, "ैंअपनबहन बड़े बल िपटकर मललयिऔर अब गई" अतउसनउसकनपरखा।

9 जब िि ैं जननरहिगई ूँ, तब उसनअपनिकर पतििा। 10 और ििएक उतपन11 तब िकहा, "अह!" इसलिउसनउसकरखा। 12 िििएक और उतपन13 तब िकहा, "ैं धनूँ; िचय िाँ धनकहेंी।" इसलिउसनउसकआशरखा।

14 ूँ कटनिों ें ें फल30:14 फल: फल "फल" कहै, यह ें और गनै, और ि इसकइचउतिऔर महिगरभवतें मदद करतै। िे, और वह उनकअपनिगया, तब िकहा, "अपनफलों ें े।" 15 उसनउससकहा, "पति िै? अब फल हतै?" कहा, "अचा, फलों बदलवह आज एगा।" 16 ाँजब रहा, तब िउससेंकरनिकली, और कहा, "आना, ोंि ैंअपनफल कर सचमिा।" तब वह उस उसा। 17 तब परमवर िी, और वह गरभवतऔर उसकाँचवाँ उतपन18 तब िकहा, "ैंअपनपति अपनी, इसलिपरमवर मजदै।" इसलिउसनउसकइसरखा। 19 ििगरभवतऔर उसकछठवाँ उतपन20 तब िकहा, "परमवर अचिै; अब पति बनरहा, ोंि उससउतपनैं।" इसलिउसनउसकजबरखा। 21 ततपशउसकएक , और उसनउसकरखा। 22 परमवर ि 30:22 परमवर ि ी: परमवर ऐससमय ें ि उसकिउचिा, जब उसनउसिभर रहनऔर रखनपढ़ा िा। , और उसकनकर उसकी। 23 इसलिवह गरभवतऔर उसकएक उतपन; तब उसनकहा, "परमवर मधरकर िै।" 24 इसलिउसनयह कहकर उसकरखा, "परमवर एक और ा।"

समझ

25 जब उतपन, तब कहा, "िकर ि ैं अपनऔर ँ। 26 िाँ और बचे, िनकिैंै, उनें ि ैं चलँ; नति ैंै।" 27 उससकहा, "यदि ि ें ैंअनरह ै, यहीं रह ा; ोंि ैंअनभव िि यहरण आशै।" 28 िउसनकहा, "बति ैं झकूँ, और ैं उसूँा।" 29 उसनउससकहा, "नति ैंी, और पशिरकरहे। 30 आनपहलितने, और अब ितनगए ैं; और यहआनपर आशै। पर ैं अपनघर कब करना?" 31 उसनिकहा, "ैं ूँ?" कहा, "े; यदि िएक करे, ैं ि़-बकरिों चरा, और उनकरककरूँा। 32 ैं आज सब ़-बकरिों कर िकलूँा, और बकरिितकबरो, और ो, और बकरितकबरऔर िो, उनें ैं अलग कर रखूँा; और मजदें ठहरेंी। 33 और जब आगमजदचरमनचले, तब धरयही; अरबकरिों ें िितकबरो, और ़ों ें ो, यदि िकलें, ठहरेंी।" 34 तब कहा, "कहनअनो।" 35 अतउसनउसिसब और ितकबरबकरों, और सब िऔर ितकबरबकरिों ो, अरिनमें उजलपन ा, उनकऔर सब ़ों अलग करकअपनों ौंिा। 36 और उसनअपनऔर ें िअनतर ठहरा; और ़-बकरिों चरलगा।

37 तब ि, और , और अरों हरी-हरछड़िाँ कर, उनकिलककहीं-कहीं े, उनें बनिा, ऐसि उन छड़िों सफिलगी। 38 और तब छड़िों ़-बकरिों मनउनककठों ें खड़ा िा; और जब िआईतब िगईं। 39 छड़िों मनिकर, ़-बकरिाँ े, िऔर ितकबरबचजनीं। 40 तब ़ों बचों अलग-अलग िा, और ़-बकरिों ुँिऔर सब बचों ओर कर िा; और अपनों उनसअलग रखा, और ़-बकरिों िलनिा। 41 और जब जब बलवऩ-बकरिाँ िीं, तब-तब उन छड़िों कठों ें उनकमनरख ा; िससछड़िों खतिँ। 42 पर जब िबल ़-बकरिाँ िी, तब वह उनें उनकआगनहीं रखता। इससिबल-निबल रहीं, और बलवनत-बलवनगईं। 43 इस रकवह अतयनधनगया, और उसकबह़-बकरिाँ, और िाँ और और और गदहगए

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