यूसुफ का स्वयं को प्रगट करना
1 तब यूसुफ उन सब के सामने, जो उसके आस-पास खड़े थे, अपने को और रोक न सका; और पुकारकर कहा, "मेरे आस-पास से सब लोगों को बाहर कर दो।" भाइयों के सामने अपने को प्रगट करने के समय45:1 अपने को प्रगट करने के समय: यूसुफ अब अपने भाइयों को यह विस्मित कर देनेवाला तथ्य बताता है कि उनका खोया हुआ भाई वही है। वह अपने को रोक नहीं पाया। यूसुफ के संग और कोई न रहा। 4 फिर यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा, "मेरे निकट आओ।" यह सुनकर वे निकट गए। फिर उसने कहा, "मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूँ, जिसको तुम ने मिस्र आनेवालों के हाथ बेच डाला था। (प्रेरि. 7:9) 5 अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहाँ बेच डाला, इससे उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे तुम्हारे आगे भेज दिया है45:5 परमेश्वर ने .... मुझे तुम्हारे आगे भेज दिया है: वह यह बताता है कि यह परमेश्वर की योजना थी कि उनके प्राण बचाए जाएँ। अतः वे नहीं बल्कि परमेश्वर उन्हें अपनी दया में मिस्र में लाया ताकि उनके प्राण बच जाएँ।। (प्रेरि. 7:15) 15 वह अपने सब भाइयों को चूमकर रोया और इसके पश्चात् उसके भाई उससे बातें करने लगे।