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Jó 32

एलतर

1 तब उन ों ों यह खकर ि अयअपनि ें ि32:1 अयअपनि ें िै: इसकिउसकसमकइसलिितर नहीं ि वह अपनि ें िपरनइसलिि उनकिउसिवश नहीं कर और उनकअब कहनिनहीं बचा। उसकउततर िा। 2 और रकएल32:2 एलू: इस अरपरमवर वह यह शबसचपरमवर यहिरतिगत ें िइस अरऐसपरमवर परमवर ा, उसकभडउठा। अयपर उसकइसलिभडउठा, ि उसनपरमवर नहीं, अपनिठहरा। 3 िअयों िों िउसकइस रण भडा, ि अयउततर सके, उसकठहरा। 4 एलअपनउनसनकर अयों अनहतरहा। 5 परनजब एलि ों उततर नहीं े, तब उसकभडउठा। 6 तब रकएलकहनलगा,

"ैं जवूँ, और बह़े ो;

इस रण ैं रहा, और अपनिबतडरता।

7 ैं चता, आयें बड़े ैं करें,

और बहवरैं, ि िँ।’

8 परनमनें आती,

और सरवशकिपरमवर अपनाँउनें समझनशकि ै।

9 िैं बड़े-बड़े नहीं

और समझऩे नहीं े।

10 इसलिैं कहतूँ, ो;

ैं अपनिबता।’

11 "ैं ें ननठहररहा,

ैं रमननिठहररहा;

जबकि कहनिशबूँरहे।

12 ैं िलगकर नतरहा।

परनिअयपकखणडन नहीं िा,

और उसकों उततर िा।

13 मत समझि हमकऐसि िै,

ि उसकखणडन मननहीं परमवर कर सकत32:13 उसकखणडन मननहीं परमवर कर सकतै: इसकअभिि परमवर अयउसकइस ििकर सकतऔर उस पर सतरगट करकउसबनसकतै। मनरह ै।

14 ें उसनकहीं वह िनहीं कहीं,

और ैं ों उसकउततर ूँा।

15 "िि, और िउततर नहीं िा;

उनोंें करनिा।

16 इसलिि नहीं लतऔर पचखड़े ैं,

इस रण ैं ठहररहूँ?

17 परनअब ैं कहूँा,

ैं अपनिरगट करूँा।

18 ोंि मन ें ें भरैं,

और आतउभरहै।

19 मन उस खमधसमै, गयो;

वह नई िों समफटै।

20 ि िैं ूँा;

ैं ुँलकर उततर ूँा।

21 ैं िआदमपककरूँा,

और ैं िमनपलपदवूँा।

22 ोंि पलकरनआतनहीं,

नहीं जनहषण भर ें उठा।

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