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अय्यूब 17

अयथन

1 "िकलनपर ै, िैं;

िकबै।

2 िचय ैं वह ठटकरनैं,

और उनकझगड़ा-रगड़ा लगिै।

3 "जमनत े, अपनऔर ें िो;

पर े?

4 उनकमन समझन17:4 उनकमन समझनै: उसकतथकथििों मन ो। अयकहति और िनसिकतैं और उसककरनें अकषम ैं। अत: वह चनकरति वह अपनकददमपरमवर समकरखा। ,

इस रण उनकरबल करा।

5 अपनिों गलकर ा,

उसकबचों ें ी।

6 "उसनऐसिि सब उपमैं;

और ुँपर कतैं।

7 ों ें ुंधलपन गयै,

और सब समगए ैं।

8 इसखकर चकिैं,

और िैं, वह भकििभडउठतैं।

9 धरअपनपकड़े रहेंे,

और करनमरपर मरे।

10 सब सब आओ आओ,

परनों ें एक ििा।

11 िे, और मनसिगई,

और मन ें ा, वह ै।

12 िठहरे;

कहतैं, ििकट उजिै।

13 यदि आशयह ि अधा,

यदि ैंिें अपनिििै,

14 यदि ैंसड़ाहट कहा, िै,’

और ़े े, ाँ,’ और बहन ै,’

15 आशकहाँ रही?

और आशिसकखनें आएगी?

16 वह अधें उतर एग17:16 वह अधें उतर एगी: अरआशअधें चलएगी। वन और आननसब आशिनकैंै, वहाँ चलएगी।,

और उस समिें ििा।"

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