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Jó 29

अयिवचन

1 अयऔर अपनउठऔर कहा,

2 "भला, ि दशमहों ी,

ििों ें परमवर रककरता,

3 जब उसकपक रकिपर रहता,

और उससउजिकर29:3 उससउजिकर: उसकगदरशन एवििशक ें ैं कर चलता।

4 जविे,

जब परमवर िरतपर रगट ी।

5 उस समय तक सरवशकिपरमवर रहता,

और बचों ओर रहते।

6 तब ैं अपनों मलऔर

चटों बहकरतीं।

7 जब-जब ैं नगर टक ओर चलकर ें

अपनठनकरता,

8 तब-तब जवखकर िे,

और रनिउठकर खड़े े।

9 िलने,

और ुँूँरहते।

10 रधरहत

और उनकसट ी।

11 ोंि जब समनता, तब वह धनकहता,

और जब खता, तब िषय ा;

12 ोंि ैं जन ो,

और असहअऩा29:12 असहअऩाा: अरिदरिजन वककरनधन और वह उसकअपनकददमकर आयउसनउसउसकषण करि ि

13 पर आशा,

और रण िधवआननी।

14 ैं िकतपहनरहा, और वह ांरहा;

िऔर दर पगड़ी ा।

15 ैं ों िें,

और गड़ों िाँठहरता।

16 दरिों ैं िठहरता,

और पहचउसककददमैं छतकरका।

17 ैं िमनों ़ें लता,

और उनकिउनकुँनकर बचा।

18 तब ैं चता, ितकणों समअनगिनत ोंे,

और अपनबसें ा।

19 जडजल ओर ी,

और पर ओस भर पड़ी रही,

20 महिों ों बनरही,

और धनें सदनयएगा।

21 "ओर लगकर ठहररहत

और सममति नकर रहते।

22 जब ैं कता, तब और लते,

ें उन पर ेंबरसकरतीं।

23 बरसी, खत29:23 बरसी, खते: अरऔर ि वररतिकरतै। ;

और बरसअनवरिुँपसरहते।

24 जब उनकआशरहततब ैं सकर उनकरसनकरता;

और ुँिसकता।

25 ैं उनका, और उनमें ठहरकर करता,

और ें िकरनों

िा, ैं रहता।

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