45 "जिसमें वह व्याधि हो उस कोढ़ी के वस्त्र फटे और सिर के बाल बिखरे रहें, और वह अपने ऊपरवाले होंठ को ढाँपे हुए अशुद्ध, अशुद्ध पुकारा करे13:45 अशुद्ध, अशुद्ध पुकारा करे: कोढ़ी पाप के संसार का जीवित दृष्टान्त था जिसकी मजदूरी मृत्यु थी। कोढ़ी को मृतक के लिये विलाप करने के सामान्य लक्षण प्रगट करने थे। । 46 जितने दिन तक वह व्याधि उसमें रहे उतने दिन तक वह तो अशुद्ध रहेगा; और वह अशुद्ध ठहरा रहे; इसलिए वह अकेला रहा करे, उसका निवास-स्थान छावनी के बाहर हो। (लूका 17:12)
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लैव्यव्यवस्था 13
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