15 और वह उसके घर में भोजन करने बैठा; और बहुत से चुंगी लेनेवाले और पापी भी उसके और चेलों के साथ भोजन करने बैठे, क्योंकि वे बहुत से थे, और उसके पीछे हो लिये थे। 16 और शास्त्रियों और फरीसियों ने यह देखकर, कि वह तो पापियों और चुंगी लेनेवालों के साथ भोजन कर रहा है, उसके चेलों से कहा, "वह तो चुंगी लेनेवालों और पापियों के साथ खाता पीता है!" 17 यीशु ने यह सुनकर, उनसे कहा, "भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूँ2:17 मैं धर्मियों को नहीं, .... आया हूँ: यहाँ पर यीशु अपने आने के उद्देश्य को दर्शाता है, वह पापियों, बीमारों और नाश होती हुई दुनिया को बचाने के लिए आया था।।"
मरकुस 2:15-17
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- OHSS Hindi Contemporary Version
15 जब मसीह येशु लेवी के घर पर भोजन के लिए बैठे थे, अनेक चुंगी लेनेवाले तथा अपराधी व्यक्ति मसीह येशु तथा उनके शिष्यों के साथ भोजन कर रहे थे. एक बड़ी संख्या में लोग उनके पीछे हो लिए थे. 16 मसीह येशु को अपराधी व्यक्तियों के साथ भोजन करते देख व्यवस्था के शिक्षकों ने, जो वास्तव में फ़रीसी2:16 फ़रीसी यहूदियों के एक संप्रदाय ये लोग कानून-व्यवस्था के सख्त पालन में विश्वास करते थे थे, उनके शिष्यों से प्रश्न किया, "यह चुंगी लेनेवाले तथा अपराधी व्यक्तियों के साथ क्यों खाता-पीता है?"
17 यह सुन मसीह येशु ने उन्हें ही संबोधित कर कहा, "वैद्य की ज़रूरत रोगी को होती है, स्वस्थ व्यक्ति को नहीं. मैं धर्मियों का नहीं परंतु पापियों का उद्धार करने आया हूं."
- HSB Hindi Standard Bible
15 फिर ऐसा हुआ कि यीशु उसके घर भोजन करने बैठा, और बहुत से कर वसूलनेवाले और पापी भी यीशु और उसके शिष्यों के साथ भोजन करने लगे; क्योंकि वे बहुत थे जो उसके पीछे चल रहे थे। 16 जब उन फरीसियों ने जो शास्त्री थे देखा कि वह पापियों और कर वसूलनेवालों के साथ भोजन कर रहा है तो उसके शिष्यों से कहने लगे, "वह कर वसूलनेवालों और पापियों के साथ क्यों खाता-पीता है?" 17 यह सुनकर यीशु ने उनसे कहा,"वैद्य की आवश्यकता स्वस्थ लोगों को नहीं बल्कि बीमारों को है। मैं धर्मियों को नहीं बल्कि पापियों को बुलाने आया हूँ।"2:17 कुछ हस्तलेखों में इस वाक्य का अनुवाद इस प्रकार है : "मैं धर्मियों को बुलाने नहीं, बल्कि पापियों को पश्चात्ताप कराने आया हूँ" लिखा है।
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