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Marcos 2

3 और एक लकवमनों उठवकर उसकआए4 परनजब रण उसकिकट पहुँसके, उनोंउस छत िसकवह ा, िऔर जब उसउधे, उस िपर लकवपड़ा ा, लटकिा। 5 े, उनकिखकर, उस लकवकहा, ", षम" 6 तब कई एक वहाँ े, अपने-अपनमन ें िकरनलगे, 7 "यह मनों ऐसकहतै? यह परमवर िकरतै! परमवर और षमकर सकतै?" (यशा. 43:25) 8 रनअपनआतें िा, ि अपने-अपनमन ें ऐसिकर रहैं, और उनसकहा, "अपने-अपनमन ें यह िों कर रहो? 9 सहज ै? लकवयह कहनि षम, यह कहना, ि उठ अपनउठकर चल ि? 10 परनिससि मनपर षमकरनअधिै।" उसनउस लकवकहा, 11 "ैं कहतूँ, उठ, अपनउठकर अपनघर चला।" 12 वह उठा, और रनउठकर सब मनिकलकर चलगया; इस पर सब चकि, और परमवर बड़ाकरककहनलगे, "हमनऐसकभनहीं ा।"

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