इस्राएल और यहूदा की पश्चात्तापहीनता
4 हे एप्रैम, मैं तुझ से क्या करूँ? हे यहूदा, मैं तुझ से क्या करूँ? तुम्हारा स्नेह तो भोर के मेघ के समान, और सवेरे उड़ जानेवाली ओस के समान है। 6 क्योंकि मैं बलिदान से नहीं, स्थिर प्रेम ही से प्रसन्न होता हूँ6:6 मैं बलिदान से नहीं, स्थिर प्रेम ही से प्रसन्न होता हूँ: परमेश्वर पहले कह चुका है कि उनके लिए उसे खोजना आवश्यक है परन्तु अपनी भेड़ें और पशुओं के झुण्डों के साथ प्रयास करके उसे पा न सकेंगे। अतः यहाँ वह शाऊल के उत्तर के बहाने की अपेक्षा करता है कि अवज्ञा को होमबलि द्वारा प्रतिस्थापित करना। , और होमबलियों से अधिक यह चाहता हूँ कि लोग परमेश्वर का ज्ञान रखें। (मत्ती 9:13, मत्ती. 12:7, मर. 12:33)