1 बड़े धन से अच्छा नाम अधिक चाहने योग्य है,
और सोने चाँदी से औरों की प्रसन्नता उत्तम है।
7 धनी, निर्धन लोगों पर प्रभुता करता है,
और उधार लेनेवाला उधार देनेवाले का दास होता है।
26 जो लोग हाथ पर हाथ मारते हैं,
और कर्जदार के उत्तरदायी होते हैं, उनमें तू न होना।
27 यदि तेरे पास भुगतान करने के साधन की कमी हो,
तो क्यों न साहूकार तेरे नीचे से खाट खींच ले जाए?