33 अहा, परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गम्भीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं!
34 "प्रभु कि बुद्धि को किसने जाना? या
उनका मंत्री कौन हुआ? (अय्यू. 15:8, यिर्म. 23:18)
35 या किसने पहले उसे कुछ दिया है
जिसका बदला उसे दिया जाए?" (अय्यू. 41:11)