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रोमियों 11:33-35

OHSS Hindi Contemporary Version

परमेश्वर की करुणा और ज्ञान का स्तुति गान

33 ओह! कैसा अपार है

परमेश्वर की बुद्धि और ज्ञान का भंडार! कैसे अथाह हैं उनके निर्णय!

तथा कैसा रहस्यमयी है उनके काम करने का तरीका!

34 भला कौन जान सका है परमेश्वर के मन को?

या कौन हुआ है उनका सलाहकार?

35 क्या किसी ने परमेश्वर को कभी कुछ दिया है

कि परमेश्वर उसे वह लौटाएं?11:35 अय्यो 41:11

Em outras traduções

  1. HSB Hindi Standard Bible

    33 आहा! परमेश्‍वर का धन,

    बुद्धि और ज्ञान कितना गहन है!

    उसके निर्णय कैसे अथाह

    और उसके मार्ग कैसे अगम्य हैं!

    34 प्रभु का मन किसने जाना है?

    या उसका परामर्शदाता कौन हुआ है?

    35 या किसने पहले उसे कुछ दिया है

    कि उसे लौटाया जाए?11:35 यशायाह 40:13

  2. IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019

    33 अहा, परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गम्भीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं!

    34 "प्रभु कि बुद्धि को किसने जाना? या

    उनका मंत्री कौन हुआ? (अय्यू. 15:8, यिर्म. 23:18)

    35 या किसने पहले उसे कुछ दिया है

    जिसका बदला उसे दिया जाए?" (अय्यू. 41:11)

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