4 नेअ’मतें तो तरह तरह की हैं मगर रूह एक ही है।
7 लेकिन हर शख़्स में पाक रूह का ज़ाहिर होना फ़ाइदा पहुँचाने के लिए होता है।
12 क्यूँकि जिस तरह बदन एक है और उस के आ’ज़ा बहुत से हैं, और बदन के सब आ’ज़ा गरचे बहुत से हैं, मगर हमसब मिलकर एक ही बदन हैं; उसी तरह मसीह भी है।
22 बल्कि बदन के वो आ’ज़ा जो औरों से कमज़ोर मा’लूम होते हैं बहुत ही ज़रूरी हैं।