4 नेअ’मतें तो तरह तरह की हैं मगर रूह एक ही है। 5 और ख़िदमतें तो तरह तरह की हैं मगर ख़ुदावन्द एक ही है। 6 और तासीरें भी तरह तरह की हैं मगर ख़ुदा एक ही है जो सब में हर तरह का असर पैदा करता है।
7 लेकिन हर शख़्स में पाक रूह का ज़ाहिर होना फ़ाइदा पहुँचाने के लिए होता है।
22 बल्कि बदन के वो आ’ज़ा जो औरों से कमज़ोर मा’लूम होते हैं बहुत ही ज़रूरी हैं।