पाक रूह का आना
1 जब ईद — ए — पन्तिकुस्त2:1 ईद — ए — पन्तिकुस्त ईद फ़सह के पचास इन बाद पेन्तिकुस्त का दिन है का दिन आया। तो वो सब एक जगह जमा थे। 2 एकाएक आस्मान से ऐसी आवाज़ आई जैसे ज़ोर की आँधी का सन्नाटा होता है। और उस से सारा घर जहां वो बैठे थे गूँज गया। 3 और उन्हें आग के शो’ले की सी फ़टती हुई ज़बाने दिखाई दीं और उन में से हर एक पर आ ठहरीं। 4 और वो सब रूह — उल — क़ुद्दूस से भर गए और ग़ैर ज़बान बोलने लगे, जिस तरह रूह ने उन्हें बोलने की ताक़त बख़्शी।
5 और हर क़ौम में से जो आसमान के नीचे ख़ुदा तरस यहूदी येरूशलेम में रहते थे।