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गज़लुल गज़लियात 1

1 उल

2 वह अपनुँलबों े,

ूँि इशमय हतर ै।

3 'इतु़़ुशगव'इत़्ै;

इसिुँिाँ पर आशिैं।

4 ींे, हम ़ेंी।

दशअपनमहल ें आया।

हम ें दमऔर मसरोंी, हम 'इशबयमय ़्करेंी।

वह सचिपर 'आशिैं।

5 शलिो,

ैं िहफ़ािू़बसरत ूँ ़ीे़ों और परों तरह

6 मत ि ैं िहफ़ाूँ,

ूँि ैं जलूँ। ाँ ़ुे,

उनोंखज़ों िहबकर;

िैंअपनखजिगहबनहीं

7 े! बता,

अपनकहाँ चरै,

और पहर वक़्कहाँ िै?

ूँि ैं ों ों ूँ िूँ?

8 'औरतों ें सब ़ूबसरत,

अगर नहीं नतनक़्दम पर चला,

और अपऩाों चरवों े़ों चरा।

9 ी, ैं़िर’औन रथ ़िों ें एक िै।

10 लगु़़ों ें ु़शनाँ ैं,

और गरदन िों ों ें।

11 हम िबने, और उनमें ाँजड़ेंे।

12 जब तक दशतनरमरहा,

महक उडरही।

13 महबिदसै,

भर पड़ा रहतै।

14 महबिऐनजदिहनों ै।

15 , ू़बसरत ी,

़ूबसरत ै। ें कबतर ैं।

16 , ू़बसरत महब, बलि िपसनै;

हमपलसबै।

17 हमघर शहतवदऔर हमकड़िाँ सनबर ैं।

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