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गज़लुल गज़लियात 3

जवऔरत

1 ैंअपनपलपर उसूँै;

ैंउसूँपर ा।

2 अब ैं उठूँऔर शहर ें िूँी,

गलिों ें और ़ाों ें, उसकूँूंै।

ैंउसूँपर ा।

3 पहरशहर ें िरतैं िे। ैंा,

"उसै, ै?"

4 अभैं उनस़ा आगबढ़ी ी,

ि िगया। ैंउसपकडरखऔर उस़ा;

जब तक ि ैं उसअपनाँ घर ें और अपनिआरमगें गई

5 शलिो,

ैं ़ाों और िरनों सम ूँ ि जगउठ,

जब तक ि वह उठने।

6 यह और और गरों तम'इतों ु’अततर कर,

िुंखमतरह चलआतै।

7 ो, यह लकै!

िसकइसईलबहों ें पहलवैं।

8 वह सब सब शमशरजऔर ें िैं।

तरवजह हर एक तलवउसकपर लटक रहै।

9 दशबनलकड़िों अपनिएक लकबनव

10 उसकाँबनव,

उसकठनजगह और गदअरबनव;

और उसकदर , शलिों इशआरिा।

11 ििो,

हर िकलऔर दशो;

उस उसकाँ उसकिऔर उसकिदमिउसकिपर रखा।

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