7 सैलाब 'इश्क़ को बुझा नहीं सकता,
बाढ़ उसको डुबा नहीं सकती,
अगर आदमी मुहब्बत के बदले अपना सब कुछ दे डाले तो वह सरासर हिकारत के लायक़ ठहरेगा।
7 सैलाब 'इश्क़ को बुझा नहीं सकता,
बाढ़ उसको डुबा नहीं सकती,
अगर आदमी मुहब्बत के बदले अपना सब कुछ दे डाले तो वह सरासर हिकारत के लायक़ ठहरेगा।