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Deuteronômio 28

कम ननबरकतें

1 और अगर ़ुवनअपऩु28:1 हुक्मांिकर उसकइन सब ों पर, आज िैं झकूँ, एहति'अमल कऱुवऩुिसब ़ौों ़्झकसरफकरा। 2 और अगर ़ुवनअपऩुयह सब बरकतें पर ़िोंऔर झकिेंी। 3 शहर ें रक ा, और ें रक ा। 4 औल, और , और ों बचे, ा’बढऔर बकरिों बचरक ोंे। 5 करऔर कठों रक ोंे। 6 और अनदर आतवक़्रक ा, और हर वक़्रक ा। 7 ़ुवनमनों पर हमलकरें, मनिकसिएगा; वह ़ाबलएक आएे, िों कर आगेंे। 8 ़ुवनअमरख़ाों ें और सब ों ें िनमें लगबरकत ा, और ़ुवऩुउस ें िवह झकझकबरकत बख़्ा। 9 अगर ़ुवनअपऩुों और उसकों पर चले, ़ुवनअपनउस सम िउसनझकअपऩौबनकर ़ाईम रखा। 10 और िसब ़ौें यह खकर ि ़ुवनकहलै, डर ी। 11 और िझकसम ़ुवनी, उसमें ़ुवनऔलऔर ों बचों और ़ूबढ़ा कर झकबढ़ाएगा। 12 ़ुवनआसमउसकअच़ािि ें वक़्पर ेंबरस, और वह सब ों ें िनमें लगबरकत ा; और बह़ौों ा, ि़ुनहीं ा। 13 और ़ुवनझकनहीं बलि िठहरएगा, और पसनहीं बलि सरफरहा; बशरि ़ुवनअपऩुों ो, ैं झकआज िूँ, और एहतिउन पर 'अमल करो, 14 और िों ैं आज िझकूँ, उनमें िदहनकर और ा’ों रवऔर इबदत करे।

ा’फरमनतें

15 "िअगर ऐसकरे, ि ़ुवनअपऩु28:15 हुक्मनकर उसकसब अहकऔर आईन पर आज िैं झकूँ एहति'अमल करे, यह सब ा’नतें पर ़िोंऔर झकलगेंी। 16 शहर ें ा’नता, और ें ा’नता। 17 करऔर कठों ा’नतठहरेंे। 18 औलऔर , और बढऔर बकरिों बचा’नतोंे। 19 अनदर आता’नतठहरा, और हर ा’नतठहरा। 20 ़ुवनउन सब ों ें िनकलग, ा’नत और इजिऔर फटकपर ़िकरजब तक ि हलकर जलबर, यह उन बद’आमिों वजह िनककरनवजह झका। 21 ़ुवनऐसकरि वबिपटरही, जब तक ि वह झकउस िपर ़ा करनवहाँ रहकर े। 22 ़ुवनझकतप िऔर ़ाऔर ़िऔर शदहररत और 28:22 तलवारतलवऔर समऔर ा, और यह पड़े रहेंजब तक ि े। 23 और आसमिपर तल ा, और एगी। 24 ़ुवनेंबदलपर ़ाऔर बरसएगा; यह आसमपर पडरही, जब तक ि हले। 25 "़ुवनझकमनों आगिकसिएगा; उनक़ाबलिएक एगा, और उनकमनों कर ा, और ितमसलतनतों ें िा। 26 और हवपरिों और दरिों ़ुी, और उनककर भगा। 27 ़ुवनझक28:27 मुल्कि़ों, और बव, और जली, और ़ािें ऐसिकरि कभअचनहीं ा। 28 ़ुवनझकऔर और िघबरहट ें िकर ा। 29 और ें टटलतपहर िटटलतिऔर अपनधनों ें रहा; और पर हमा, और टतरहऔर झकबच30 'औरत गनकरिसरउससरत करा, घर बनएगिउसमें बसनएगा, िलगएगिउसकफल इसे’करा। 31 ों मनबह िएगिउसकएगा, गधजबरन िएगऔर झकििा, ़ें मनों लगेंऔर झकबच32 और िाँ सऱौी, और ें ेंऔर िउनकितरसततरसतरह ी; और बस नहीं चला। 33 और कमएक ऐस़ौएगिसस़िनहीं; और हममजऔर दबरहा, 34 यहाँ तक ि इन ों अपनों खकर एगा। 35 ़ुवनटनों और ाँों ें ऐस़े करा, ि उनसाँतलवकर िाँतक ि़ा सका। 36 ़ुवनझकऔर दशो, िअपनऊपर रर करा, एक ऐस़ौएगिऔर नतनहीं; और वहाँ और ा’ों महजलकड़ी और पतथर इबदत करेंे। 37 और उन सब ़ौों ें, जहाँ जहाँ ़ुवनझकपहुँएगा, इस रत और उल मसल और बना। 38 ें बहएगकन ़ा जमा' करा, ूँि िउसेंी। 39 िलगएगऔर उन पर हनत करा, िमय और जमा' करना; ूँि उनक़े े। 40 सब हदों ें ़ैदरख़्लगोंे, िउनकनहीं लगएगा; ूँि ़ैदरख़्ों फल झडकरा। 41 और िाँ ोंिवह सब रहेंे, ूँि वह ़ुकर चले। 42 सब दरख़्ों और सब पर ििाँ ़ा कर ेंी। 43 परदवह झसबढऔर सरफएगा, िपसपसएगा। 44 वह झका, िउससका; वह िऔर ठहरा। 45 और ूँि ़ुवनअपऩुउन ों और आईन पर िनकउसनझकिै, 'अमल करनिउसकनहीं ेंे; इसलियह सब ा’नतें पर आएऔर पड़ी रहेंऔर झकलगेंी, जब तक 46 और वह पर और औलपर हमिऔर अचमपर रहेंी। 47 और ूँि वजसब ़ों ़िरहत और ़ुशदि़ुवनअपऩुइबदत नहीं करा। 48 इसलिऔर और और सब ़ों हतकर अपनमनों ़िदमत करिनक़ुवनबरख़िा; और गरदन पर रखरहा, जब तक 28:48 हुक्मवह कर े। 49 ़ुवनबलि िएक ़ौपर चढ़ा एग'उक़ाकर आतै, उस ़ौनहीं समझा; 50 उस ़ौशरोंे, ों िकरेंजवों पर तरस े। 51 और वह ों बचों और रहेंे, जब तक और वह िअन, मय, , बढी, बकरिों बचनहीं ़ेंे, जब तक वह झककर ें। 52 और वह तमें िबसिों ें िरहेंे; जब तक ें िपर भरा, िँ। िवह उस सब बसिों ें करेंे, ि़ुवऩुझकै। 53 तब उस ि़े' पर और उस आड़े वक़्ें अपनमनों आकर अपनिपहलफल ो, ा’अपनों और िों िनक़ुवऩुझक'अतिा। 54 वह शख़्ें ़ुि़ाऔर ़ुबदन ा, उसकअपनऔर अपनहमआग़ोऔर अपऩी ांबचों तरफनजी; 55 यहाँ तक ि वह इनमें िअपनबचों ें े, िनकवह ़ुएगनहीं ा; ूँि उस ि़े' पर और उस आड़े वक़्ें जब मन झकसब बसिों ें कर ेंे, उसकऔर ़ी रहा। 56 वह 'औरत ऐस़ुि़ाऔर ़ुबदन ि नरनज़ाकत वजह अपनाँतलवलगर’अत करतो, उसकअपनपहलहर और अपनऔर ी, 57 और अपऩाबचतरफउसकों िकलो, बलि अपनसब लडों तरफिनकवह जननजी; ूँि वह तम़ों ़िलत वजह उनीं कर एगी, जब उस ि़े' पर और उस आड़े वक़्ें मन बसिों ें झककर ेंे। 58 अगर उस शरी’अत उन सब ों पर इस िें िैं, एहतिरख कर इस तरह 'अमल करि मक़ुवनअपऩुजलऔर ़ौो; 59 ़ुवनपर 'अजआफें ़िकरा, और औलआफों बढ़ा कर बड़ी और रपआफें और सख़्और रपिाँ कर ा। 60 और िसब िनसडरतझकलगएगऔर वह झकलगरहेंे। 61 और उन सब िों और आफों इस शरी’अत िें मजनहीं ैं, ़ुवनझकलगएगजब तक 62 और ूँि ़ुवनअपऩुनहीं ा, इसलिकहाँ कसरत ें आसमों तरह ो, और कहाँ ें ़े रह ओगे। 63 तब यह ि भलकरनऔर मकबढ़ा़ुवऩुशन, ऐसमककरऔर हलकर लऩुवऩुशना; और उस उखिओगे, जहाँ उस पर ़ा करनरहै। 64 और ़ुवनझकएक िसरितक तम़ौों ें ितर ितर करा, वहाँ लकड़ी और पतथर और ा’ों िनकनतनहीं इबदत करा। 65 उन ़ौों झकनसऔर ाँतलवआरिा, बलि ़ुवनझकवहाँ िलरज़ाँ और ों ुंधलहट और ा। 66 और शक ें अटकरहऔर िडरतरहा, और ़िदगिा। 67 और अपनि़ौऔर उन नज़ाों वजह िनकअपनों ा, बह कहि ि और कहि बह ी। 68 और ़ुवनझकििों ें चढ़ा कर उस 28:68 मुल्क िें एगा, िसकें ैंझसकहि उसिकभखना; और वहाँ अपनमनों ़ुऔर ौंिअपनिा।"

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