1 और अपनी जवानी के दिनों में अपने ख़ालिक़ को याद कर,
जब कि बुरे दिन हुनूज़ नहीं आए और वह बरस नज़दीक नहीं हुए,
जिनमें तू कहेगा कि इनसे मुझे कुछ ख़ुशी नहीं।
2 जब कि हुनूज़ सूरज और रोशनी चाँद सितारे तारीक नहीं हुए,
और बा’दल बारिश के बाद फिर जमा' नहीं हुए;
3 जिस रोज़ घर के निगाहबान थरथराने लगे
और ताक़तवर लोग कुबड़े हो जाएँ
और पीसने वालियाँ रुक जाएँ इसलिए कि वह थोड़ी सी हैं,
और वह जो खिड़कियों से झाँकती हैं धुंदला जाए,