15 चुनाँचे कलाम में लिखा है
"अगर आज तुम उसकी आवाज़ सुनो,
तो अपने दिलों को सख़्त न करो, जिस तरह कि ग़ुस्सा दिलाने के वक़्त किया था।"
15 चुनाँचे कलाम में लिखा है
"अगर आज तुम उसकी आवाज़ सुनो,
तो अपने दिलों को सख़्त न करो, जिस तरह कि ग़ुस्सा दिलाने के वक़्त किया था।"