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मीकाह 4

़ुआनकल ें मत

1 िआख़ििों ें ूँ ि ़ुवनघर पहपह़ों िों पर ़ाईम िएगा, और सब ों बलऔर उममतें वहाँ पहुँेंी। 2 और बह़ौें आएी, और कहेंी, 'आओ, ़ुवनपहपर चढ़ें, और ा’़ू़ुघर ें ़िों, और वह अपनें हम बतएगऔर हम उसकों पर चलेंे। ूँि शरी’अत िे, और ़ुवनकलशलिा। 3 और वह बहउममतों 'अदलत करा, और तवर ़ौों ाँा; और वह अपनतलवों कर ें, और अपनों बनेंे; और ़ौ़ौपर तलवचलएगी, और वह िकभकरनेंे। 4 तब हर एक आदमअपनऔर अपनदरख़्ा, और उनकडरएगा, ूँि रबउल अफअपनुँरमै। 5 ूँि सब उममतें अपनअपना’चलेंी, िहम हमहमतक ़ुवनअपऩुचलेंे। 6 ़ुवनरमै, ि ैं उस गड़ों जमा' करूँऔर ाँिगए और िनकैंिा, इकठकरूँा; 7 और गड़ों बक़िा, और िवतनों तवर ़ौबना; और ़ुवनिपर अब हमहमतक उन पर सलतनत करा। 8 गलदग, ििपह़ी, िै; सलतनत, ा’तर शलदशिी। 9 अब ूँ िै, दऱिें िै? ें दशनहीं? सलहकहलगया? 10 िि, तरह तकलउठऔर इश दरें िो; ूँि अब शहर िकल कर ें रहऔर तक एगवहाँ िी। और वहीं ़ुवनमनों ़ाएगा। 11 अब बह़ौें ़िजमा' ैं और कहतैं "िऔर हमें उसकें।" 12 िवह ़ुवनतदबआगनहीं, और उसकमसलहत नहीं समझतीं; ूँि वह उनकखलों तरह जमा' करा। 13 िि, उठ और यमकर, ूँि ैं ींऔर ों तल बना, और बहउममतों कड़े कड़े करी; उनक़ी़ुवननज़्करऔर उनकरबउल 'आलममनएगी।

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