37 चलते चलते वह उस जगह के क़रीब पहुँचा जहाँ रास्ता ज़ैतून के पहाड़ पर से उतरने लगता है। इस पर शागिर्दों का पूरा हुजूम ख़ुशी के मारे ऊँची आवाज़ से उन मोजिज़ों के लिए ख़ुदा की बड़ाई करने लगा जो उन्होंने देखे थे,
38 "मुबारिक़ है वह बादशाह जो ख़ुदावन्द के नाम से आता है।
आस्मान पर सलामती हो और बुलन्दियों पर इज़्ज़त — ओ — जलाल।"