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लूका 20

हक पर सवउठ

1 एक िजब वह उल दस ें ों रहऔर ़ुवऩुशखबररहरहनइम, शरी’अत उलमऔर ़ुउस आए2 उनों कहा, "हमें बतँ, आप यह िइख़्िकर रहैं? िआप यह इख़्ििै?" 3 ईसजविा, "एक सवै। बत?, 4 ि हनबपतिआसी?" 5 वह आपस ें बहकरनलगे, "अगर हम कहें आसी’ वह ा, िउस पर ईमूँ ?6 िअगर हम कहें ी’ तमहम पर पतथर ेंे, ूँि वह यक़ीरखतैं ि हननबा।" 7 इस िउनों जविा, "हम नहीं नति वह कहाँ ा।" 8 ईसकहा, "िैं नहीं बति ैं यह सब िइख़्िकर रहूँ।"

9 िईसों यह िलगा, "िआदमएक लगा। िवह उसों पर कर बहिों िहरचलगया। 10 जब पक गए उस अपनकर उन िि वह ििवसकरे। िों उस िकरकउस़ािा। 11 इस पर िएक और कर उन ा। िों उसकर उस े’इज़्और ़ाििा। 12 ििसरकर िा। उसउनोंकर ़्कर िऔर ििा। 13 िकहा, अब ैं करूँ? ैं अपनूँा, यद वह उस िकरें।’ 14 ििकर ों आपस ें मशवरिऔर कहा, यह िै। आओ, हम इसें। िइस हमी। 15 उनोंउसहर ैंकर िा। ईसा, अब बत, िकरा? 16 वह वहाँ कर ों हलकरऔर सरों हवकर ा। यह कर ों कहा, ़ुऐसकभकरे।" 17 ईसउन पर नजकर ा, "िकलदस इस हवमतलब ि

िपतथर जगों रदिा,

वह िपतथर बन गया’?

18 इस पतथर पर िवह कड़े कड़े एगा, जबकि िपर वह ़ुिउसा।"

19 शरी’अत उलमऔर हनइमों उसवक़्उसपकडिी, ूँि वह समझ गए ि िें बयहम ैं। िवह अवडरते। 20 ाँवह उसपकड़ा ूँडतरहे। इस मक़्सद तहत उनोंउस ियह अपनआप ईमनद़ािकरकईसआए ि उस पकडकर उसिहवकर सकें। 21 इन ों उस ा, "उस, हम नतैं ि आप वहबयकरतऔर िैं सहै। आप तरफनहीं करतबलि िनतद़ुैं। 22 अब हमें बति िमहसयजयज़?" 23 िईसउन ाँऔर कहा, 24 "ाँएक िििरत और इस पर बनै?" उनों जविा, "़ैसर ा।" 25 उस कहा, "़ैसर ़ैसर और ़ु़ुो।" 26 ूँ वह अवमनउस पकडें रहे। उस जवकर वह हकबकरह गए और मज़ीकर सके।

27 िसद़ी उस आएसद़ी नहीं नति मत ें उठेंे। उनों ईसएक सविा, 28 "उस, हमें िि अगर आदमऔलमर और उस ि वह करकअपनिऔलकरे। 29 अब करें ि े। पहली, िऔलमर गया। 30 इस पर सरउस ी, िवह औलमर गया। 31 िसरउस ी। यह िलसितवें तक रहा। इसकहर करनमर गया। 32 आख़िें गई33 अब बति मत िवह िी? ूँि इयों उस ी।" 34 ईसजविा, "इस ें करतऔर करैं। 35 ििें ़ुआनें शरऔर ों ें उठनयकसमझतवह उस वक़्नहीं करेंे, उन िकरएगी। 36 वह मर नहीं सकेंे, ूँि वह िों तरह ोंऔर मत इस ़ुोंे। 37 और यह ि उठें़ािगई ै। ूँि जब वह ाँ़ी आयउस ़ुयह िा, अबरह़ुा, इज़ुऔर ़ू़ुा, ाँि उस वक़्ों बहपहलमर े। इस मतलब ि यह हक़ीें ़िैं। 38 ूँि ़ुों नहीं बलि ़िों ़ुै। उस नजयह सब ़िैं।" 39 यह कर शरी’अत उलमकहा, "उस, आप अचकहै।" 40 इस उनों उस सवकरनिमत ी।

41 िईसउन ा, "मसें ूँ कहि वह ऊद ै? 42 ूँि ऊद ़ुिें रमै,

़ु़ुकहा,

ि,

43 जब तक ैं मनों ों बनूँ।’

44 ऊद ़ुमस़ुकहतै। िवह ितरह ऊद सकतै?"

45 जब रहउस अपनिों कहा, 46 "शरी’अत उलमबरदरहो! ूँि वह नद़े पहन कर इधर उधर िरनपसनकरतैं। जब ़ाों ें सलकरकउन इज़्करतैं िवह ़ुैं। उन बस एक ़्िि इबदतख़ाों और वतों ें इज़्िों पर ँ। 47 यह घर हडकर और ििलमलमआएाँगतैं। ऐसों ियत सख़्सज़ा िी।"

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