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अह्बार 22

1 और ़ुवनकहा, 2 "और उसकों कह ि वह बनइसईल ़ों िनकवह िकरतैं अपनआप बचरखें, और रमत करें; ैं ़ुवनूँ। 3 उनककह ि नसल दर नसल नसल ें अपनलत ें उन ़ों , िनकबनइसईल ़ुवनिकरतैं, वह शख़्मनएगा; ैं ़ुवनूँ। 4 नसल ें ़ी, िरयमरवह जब तक , ़ों ें ; और ऐसवजह गई ै, उस शख़्िबहत5 िेंगननदिसकवह सकतै, िऐसशख़्िससउसकवह ि़िउसकलग सकतो; 6 वह आदमइनमें ितक रहा, और जब तक ़ुकर ़ों ें ; 7 और वह उस वक़्ठहरजब आफ, इसकवह ़ों ें , ूँि यह उसक़ुै। 8 और रददरिों ़े नवर वह अपनआप नजिकर े; ैं ़ुवनूँ 9 इसलिवह शरा' े, ऐसि उस वजह उनकिलगऔर उसकरमतकरनवजह वह मर ँ, ैं ़ुवनउनककरनूँ। 10 'अजनबवह ियहाँ ठहरो, उसककर वह ; 11 िवह ििअपनउससकतै, और वह उसकघर ें ों वह उसकें ँ। 12 अगर ििअजनबगई ो, वह ़ों ़ुें 13 िअगर ि, तललक़ा और औलो, और लडकपन िों तरह अपनघर ें िकर रहवह अपनें ; िअजनबउस14 और अगर अनजें वह उसकाँचवें िबरबर अपनउस ें िकर वह ि15 और वह बनइसईल ़ों िनकवह ़ुवननज़्करतों रमत करके, 16 22:16 मुक़द्दस क़ुरबानी को खाने देने के ज़रिये ताकि उन पर जुर्म साबित कर सके जिस के लिए खम्याज़ा की ज़रूरत है — मैं खुदावंद हूँ जो लोगों को पाक करता हूँ — मैंखुदावंद हूँ जो उन कुर्बानियों को पाक करता हूँ उनकिउस ें उनक़ों ा; ूँि ैं ़ुवनउनककरनूँ।"

िऔर ा’ििां

17 और ़ुवनकहा, 18 "और उसकों और सब बनइसईल कह ि इसईल घरउन परदिों ें इसईलिों रहतैं, शख़्अपऩु, वह िनत ़ुरज़ा ़ुी, िवह ़्तऩुपर ़ुवनमनकरतैं; 19 अपनमकिों बरों बकरों ें 'ऐब नर चढ़ाा। 20 और िसमें 'ऐब उसअदकरनूँि वह तरफमका। 21 और अपनिनत करनिरज़ा ़ुपर , बकरें सलमत़ुवनमनकरे, वह नवर मकठहरनि'ऐब ो; उसमें ़्ो। 22 अनिकस'उज़्ो, िसकरसजलपपड़िाँ ों, ऐसों ़ुवनमनचढ़ाऔर मजबह पर उनकआति़ु़ुवनमनकरना। 23 िबछड़े बर'उज़़््कम उसरज़ा ़ुपर कर सकतै, ििनत करनिवह मका। 24 िनवर ़ुिचलिकटों, उस़ुवनमनचढ़ाऔर अपनें ऐसकरना; 25 और इनमें िकर अपऩु़ि़ा परदअजनबअदकरवा, ूँि उनकिउनमें ै, उनमें 'ऐब इसलिवह तरफमकोंे।" 22:25 पहले से जो लोग मुल्क — ए — कनान में रहते थे उनकी खुदा के लोगों को नक़ल करने सेबाज़ रहनाऔरउनसे मुता’सिर होने से परहेज़ करना था उन में एक ख़ास ऐब यह था किवोह काट छांट करने वाले थे — उनकी इस काट छांट सबब से कनानियों कोजानवरों की क़ससी करने वाले बतोरहवाला दिया जाता था — इसलिए यह तर्जुमा करना ज़रूरी है की यह लोग जानवरों की क़ुरबानी के लिए ना क़ाबिल थे — उन्हें क़ुरबानी के लिए कबूल नहीं किया जायेगा 26 और ़ुवनकहा, 27 "िवक़्बछड़ा बकरबचो, ितक वह अपनाँ रहऔर आठवें िऔर उसकवह ़ुवनआति़ुिमका। 28 और ़, बकरी, उसऔर उसकबचों एक िबह करना। 29 और जब ़ुवऩुकरो, उसइस तरह ़ुकरनि मकठहरो; 30 और वह उसिि, उसमें सरिबह तक ़ी ा; ैं ़ुवनूँ। 31 "इसलिों ननऔर उन पर 'अमल करना; ैं ़ुवनूँ। 32 ठहरा, ूँि ैं बनइसईल ा; ैं ़ुवनकरनूँ, 33 ििूँ ि ़ुबनरहूँ, ैं ़ुवनूँ।"

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