12 ई’द 'ए फ़ितर के पहले दिन या’नी जिस रोज़ फ़सह को ज़बह किया करते थे "उसके शागिर्दों ने उससे कहा? तू कहाँ चाहता है कि हम जाकर तेरे लिए फ़सह खाने की तैयारी करें।"
26 फिर हम्द गा कर बाहर ज़ैतून के पहाड़ पर गए।
32 फिर वो एक जगह आए जिसका नाम गतसिमनी था और उसने अपने शागिर्दों से कहा, "यहाँ बैठे रहो जब तक मैं दुआ करूँ।"
43 वो ये कह ही रहा था कि फ़ौरन यहूदाह जो उन बारह में से था और उसके साथ एक बड़ी भीड़ तलवारें और लाठियाँ लिए हुए सरदार काहिनों और फ़क़ीहों की तरफ़ से आ पहुँची। 46 उन्होंने उस पर हाथ डाल कर उसे पकड़ लिया।