8 उस 'औरत से अपनी राह दूर रख,
और उसके घर के दरवाज़े के पास भी न जा;
9 ऐसा न हो कि तू अपनी आबरू किसी गै़र के,
और अपनी उम्र बेरहम के हवाले करे।
10 ऐसा न हो कि बेगाने तेरी कु़व्वत से सेर हों,
और तेरी कमाई किसी गै़र के घर जाए;
11 और जब तेरा गोश्त और तेरा जिस्म घुल जाये तो तू अपने अन्जाम पर नोहा करे;
12 और कहे, "मैंने तरबियत से कैसी 'अदावत रख्खी,
और मेरे दिल ने मलामत को हक़ीर जाना।
13 न मैंने अपने उस्तादों का कहा माना,
न अपने तरबियत करने वालों की सुनी।
14 मैं जमा’अत और मजलिस के बीच,
क़रीबन सब बुराइयों में मुब्तिला हुआ।"